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News - नेशनल गॉंधीयन लीडरशिप कैंप

बा-बापू १५० वीं जयंती के अंतर्गत गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन व गॉंधीयन सोसायटी के संयुक्त तत्त्वावधान में १-१५ सितम्बर, २०१७ तक आयोजित नेशनल गॉंधीयन लीडरशिप कैंप सफलता से पूर्ण हुआ| इस कैंप में देश के १८ राज्यों से ५७ युवा, जिसमें एनसीसी, एनएसएस, छात्रसंघ, पोलिटीकल साईन्स के छात्र, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ता तथा प्रादेशिक स्तर पर युवा विंग को संभालने वाले कार्यकर्ता इस कैंप में सहभागी हुए थे|

इस कैंप के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए विशेष दिनचर्या कार्यान्वित की गई थी, इसमें योगासन-प्राणायाम, विचार कणिका, श्रमदान, सर्व धर्म प्रार्थना, सूत कताई, विषय की प्रस्तुति, विभिन्न राज्य की परंपरा व सांस्कृतिक धरोहर की प्रस्तुति, समूह चर्चा, संवाद एवं मूल्य आधारित खेल को साधन के रूप में प्रयोग में लाया गया| इस कैंप में मूलतः गॉंधीजी के नेतृत्व के अंग से जीवन दर्शन को दक्षिण अफ्रीका एवं भारत में उनके द्वारा किए गए सत्याग्रह, रचनात्मक कार्य, सांप्रदायिक एकता के लिए किए गए अनशन व आश्रम जीवन की पद्धति को प्रस्तुत किया गया| १५ दिन तक चले इस लीडरशिप कैंप में गॉंधी विचार आधारित तत्वदर्शन को प्रस्तुत करने के लिए देश के प्रसिद्ध विद्वानों को आमंत्रित किए गए थे|

उपस्थित विद्वानों द्वारा हर रोज विशेष प्रस्तुति होती थी, सभी विद्वानों ने गॉंधीजी के लीडरशीप के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया| यहॉं पर उनकी संक्षिप्त प्रस्तुति पर प्रकाश डाल रहे हैं|

उद्घाटन सत्रः नेशनल गॉंधीयन लीडरशिप कैंप के उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गॉंधीजी के प्रपौत्र तुषार गॉंधी, जैन इरिगेशन सिस्टिम्स लि. के अध्यक्ष एवं गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के संचालक अशोक जैन, गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद के पूर्व कुलपती

डॉ. सुदर्शन आयंगार, जलगॉंव जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी कौस्तुभ दिवेगावकर और फाउण्डेशन के संचालक मंडल के सदस्य सेवादास दलीचंद ओसवाल आदी उपस्थित थे| सभी शिविरार्थियों का विशेष रूप से स्वागत करते हुए राष्ट्रीय एकता के प्रतीक रूप में सभी राज्यों से पधारे शिविरार्थियों ने एक-दूसरे का स्वागत किया|

कौस्तुभ दिवेगावकरः कौस्तुभ दिवेगावकर ने युवाओं को गॉंधीजी को देखने का उमदा नजरिया बताया| हमें हमेशा वृद्ध गॉंधी देखने की आदत हो गई है| मगर दक्षिण अफ्रीका का हमेशा कार्य के लिये तत्पर रहनेवाला और उसे उत्साहपूर्वक पुरा करनेवाला युवा गॉंधी देखने की भी आदत होनी चाहिए|

तुषार गॉंधीः तुषार गॉंधी ने गॉंधीजी के जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में अपनी प्रस्तुति की| महात्मा गॉंधी आप और हमारे जैसे ही सामान्य जन थे| पर एक खासियत यह थी कि वे अपनी गलतियों में सुधार लाते गए और महात्मा की ओर अग्रेसर होते गए| उन्होंने कहा कि महात्मा गॉंधी के रूप में सबसे बड़ी विरासत सारे विश्व को मिली है| उनके द्वारा आचरण में लाए गए तत्त्वों को सामान्य जन समझ सके ऐसी स्थिति में प्रस्तुत किया| उन्होंने छोटी-छोटी कृतियों से ही महत्त्वपूर्ण संदेश दिए और वह कारगर सिद्ध हुए| तुषार गॉंधी ने अपने माता-पिता व दादा-दादी से सुनी गॉंधीजी की हृदयस्पर्शी बातें साझा की और शिविरार्थियों द्वारा प्रस्तुत चर्चित प्रश्नों को प्राधिकृत रूप से निराकरण किया|

अरविंद मोहन मिश्रः चंपारन सत्याग्रह पर आपने प्रकाश डाला| चंपारन सत्याग्रह के बारे में सबसे बड़ी उपलब्धि यह हुई कि गॉंधीजी ने वहॉं के लोगों के मन से डर को भगाया| लोग अपने पर हुए अत्याचार और शोषण के खिलाफ बयान देने के लिए तैयार हुए| ऐसा माना जाता है कि लगभग पैंतालीस हजार लोगों ने अपनी आपबीती प्रस्तुत की| श्रीमान् अरविंद मोहन मिश्र द्वारा चंपारन सत्याग्रह की प्रस्तुति में गॉंधीजी की कार्यशैली व रचनात्मक कार्य की नींव के लिए किए गए प्रयासों को बखूबी दर्शाया गया|

हिवरे बाजारः महात्मा गॉंधी के विचारों आधारित आदर्श गॉंव की कल्पना में भारत के कुछ गॉंव को हम देख सकते हैं| उनमें महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित हिवरे बाजार गॉंव को निश्चित रूप से सम्मिलित कर सकते हैं| शिविर में आए शिविरार्थियों को ‘ग्राम विकास में स्थानिक नेतृत्व’ इस विषय के संदर्भ में हिवरे बाजार मुलाकात एवं वहॉं के सरपंच श्रीमान पोपटराव पवार के साथ संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया| युवा बागडोर के आधार पर प्रदेश की रचना में सामाजिक परिवर्तन की नींव कैसे प्रस्थापित की जाए उनका उत्कृष्ट उदाहरण हमें हिवरे बाजार व पोपटराव पवार के अनुभव से प्राप्त हुई|

रालेगणसिद्धीः रालेगणसिद्धी में श्रीमान् अन्ना हजारे के साथ मुलाकात हुई| मुलाकात के दौरान अन्ना हजारे ने नेतृत्व गुण विकसित करने के लिए पॉंच महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाला| १. शुद्ध आचार,

२. शुद्ध विचार ३. निष्कलंक जीवन, ४. जीवन में त्याग और ५. अपमान सहन करने की क्षमता| अन्ना हजारे की मुलाकात ने हमारे शिविर्राथियों में चेतना का संचार किया|

उल्हास जाजूः श्रीमान् उल्हास जाजू ने विनोबा एवं गॉंधीजी की ग्राम स्वराज्य की संकल्पना विषय पर अपनी प्रस्तुति की| आपने कहा कि जहॉं पर लोक प्रतिनिधि को जन सामान्य का नौकर अपेक्षित होना था वहॉं मालिक बने हैं और मतदाता दीन और मम् बन गया है| सत्ता पिरामिड जैसी नहीं होनी चाहिए| वह समुद्र में जो तरंग उठती है वैसी होनी चाहिए| पिरामिड एक केन्द्रीय उदाहरण है और तरंग समानता का प्रतीक है| ग्राम विकास में सत्ता का विकेंद्रीकरण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है| गॉंधीजी कहते थे कि मनुष्य का अध्यात्मीकरण भी आवश्यक हो जाता है| मेरा श्रम ही मेरी लक्ष्मी है यह जन मानस पटल पर रेखांकित करना होगा| क्योंकि जीवन से श्रम चला गया तो विकार उत्पन्न होगा| स्वच्छंदता पर नियंत्रण लाया तो ही स्वतंत्रता का परिपालन हम कर सकेंगे| श्रीमान जाजू ने मेंढ़ा-लेखा गॉंव का उदाहरण प्रस्तुत किया, और कहा कि इस गॉंव ने यह दर्शाया की कृति भक्ति महत्त्वपूर्ण है न की व्यक्ति भक्ति|

विश्वास पाटीलः सामुदायिक एकता एवं महात्मा गॉंधी विषय पर

डॉ. विश्वास पाटील ने अपनी प्रस्तुति की| गॉंधी विचारों के साथ युवा शक्ति का कैसा उपयोग हो सकता है यह आपने उदाहरण के साथ प्रस्तुत किया| सामाजिक एकता न केवल चर्चा का विषय हो बल्कि यह व्यवहार में लाना चाहिए| समाज में जीवन यापन करते हुए अगर किसी की भी निंदा हो रही हो तो हम मान्य कर लेते हैं और उसी जगह किसी की प्रशंसा सुनते हैं तो प्रमाण मांगते हैं| इस वृत्ति में सुधार लाना बेहद आवश्यक हो गया है| नोआखाली और कलकत्ता में गॉंधीजी की करुणा, समर्पण भावना और दृढ़ निश्चय का साकार रूप दृष्टिगोचर होता है| क्योंकि उन्होंने १५ अगस्त १९४७ के स्वतंत्रता दिवस समारोह में दिल्ली न जाकर सांप्रदायिक हत्याओं को रोकने के लिए कलकत्ता जाने का निर्णय लिया| वे कहते थे मेरी अंतरात्मा की आवाज मुझे पूरे संसार से लड़ते रहने को प्रेरित करती है चाहे मैं अकेला ही क्यों न हूँ| उन्होंने ‘एकला चलो रे’ को अपना जीवन मंत्र बना लिया था| डॉ. पाटील ने अत्यंत हृदयस्पर्शी तत्त्व को प्रस्तुत करते हुए कहा कि महात्मा के संस्कारों की नींव उनके बचपन में ही बोई गई थी|

कुमार प्रशांतः गॉंधीजी की नेतृत्व कला विषय पर प्रस्तुति करने के लिए श्रीमान् कुमार प्रशांत उपस्थित थे| आपने निम्न पहलू पर गॉंधीजी के विचार को प्रस्तुत किए|

गॉंधीजी की कथनी और करनी में समानता थी| इसलिए उन्होंने मेरा जीवन ही मेरा संदेश है| इस बात को प्रस्तुत की|

अपने अंदर के डर को भगाना बेहद जरूरी है| गॉंधीजी ने सामान्य जनों को हिम्मत दी उस वजह से ब्रिटिशों की जेलें भर गईं लोग डंडे खाने को तैयार हो गए|

अपने संसाधनों के बीच जीवन जीना संपोषित विकास है|

किसी भी नायक को यह नहीं समझना चाहिए कि लोगों का उस पर ध्यान नहीं है नायक की हर कृति पर लोगों की निगाहें रहती हैं| और उस पर ही उनका सम्मान निर्भर रहता है|

लड़कियों को कभी डरना नहीं चाहिए, पुरुषवर्ग ने उनको हमेशा कम आँका है| केवल शारीरिक ताकत में ही वे कम हो सकती हैं पर मनोबल, दृढ़निश्चय और मानसिक रूप से मजबूत होती हैं|

एम. पी. मथाईः प्रो. एम. पी. मथाई ने मोहन से महात्मा के सफर को अभिनव रूप में प्रस्तुत किया| अपनी प्रस्तुति में आपने दक्षिण अफ्रीका में किए गए कार्यों को अत्यंत रोचक रूप में प्रस्तुत किया| सत्याग्रह में सत्य और अहिंसा के तत्त्व समाविष्ट हैं| प्रतिरोध लेने की पद्धति में बदले की भावना नहीं किन्तु बदलाव की भावना को केंद्र में रखा गया था| इसलिए गॉंधीजी ने कहा कि जब मैंने अपने अस्तित्व को मिटाने की तैयारी दर्शायी तब जाकर सत्याग्रह की शक्ति को पाया|

सुदर्शन आयंगारः डॉ. सुदर्शन आयंगार ने अपना अधिक समय प्रदान कर इस कैंप को सार्थक किया| आपके द्वारा की गई प्रस्तुति में विकास की परिभाषा को वर्तमान नजरिए से देखने का नया दृष्टिकोण प्राप्त हुआ| हमारे देश में न जाने कितने विकासात्मक कार्य की श्रृंखला को आगे बढ़ाने के लिए कुदरती संसाधनों का विनाश किया जाता है| मूलतः सवाल केंद्रीकरण आधारित कार्य पद्धति का है| उत्पादन की प्रक्रिया को अगर हम विकेंद्रित बनाते हैं तो पर्यावरण पर आने वाले जोखिम को टाल सकते हैं व मानव श्रम का योग्य उपयोग कर सकते हैं| इसलिए गॉंधीजी ने उत्पादन आधारित श्रम पद्धति में व्यक्ति को केंद्र स्थान पर रखा है| डॉ. आयंगार ने अपनी अनोखी शैली में उनका उदाहरण देते हुए वर्तमान विकास की नीति पर प्रकाश डाला|

हर रोज रात्रि भोजन के बाद शिविरार्थियों के साथ संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया था| उनमें डॉ. आयंगार के द्वारा गॉंधीजी द्वारा लिखित हिंद स्वराज्य पर विचार-विमर्श प्रस्तुत किया जाता था| इस संवाद कार्यक्रम के माध्यम से गॉंधीजी के विचार को समझने का मौका शिविरार्थियों को प्राप्त हुआ| इन संवाद सत्रों के दौरान कई शिविरार्थियों के सवाल के जवाब भी डॉ. आयंगार द्वारा प्रस्तुत किए गए| खास तौर पर इन सत्रों के माध्यम से शिविरार्थियों में गॉंधी विचार के प्रति एक उत्सुकता देखने को मिली|

सुब्बाराव जीः राष्ट्रीय युवा योजना के प्रमुख स्तंभ डॉ. एस. एन. सुब्बाराव ने इस कैंप में तीन दिन उपस्थित रहकर शिविरार्थियों के मनोबल को बढ़ाया| ‘राष्ट्रीय एकता में युवाओं की भूमिका’ इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किए| मूल मंत्र प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि हमें मानव देह प्राप्त हुआ है, इसलिए हमारी यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि एक घंटा देह के लिए और एक घंटा देश के लिए हम अपना योगदान प्रदान करें| आवश्यक शारीरिक व्यायाम के माध्यम से अपने आपको तंदुरुस्त रखेंगे तो ही अपने देश के लिए हम अपना सार्थक योगदान प्रदान कर सकेंगे| हम परिश्रम आधारित जीवन शैली को बढ़ावा देंगे तो ही हम अपने देश को आगे बढ़ा सकते हैं| इसलिए हमें अपने देह और देश दोनों के लिए समय देना ही चाहिए|

इन दिनों के दौरान सुब्बाराव जी द्वारा सर्व धर्म प्रार्थना प्रस्तुत की जाती थी, इससे वातावरण में निरामय शांति का अहसास होता था| कैंप के अंत में सुब्बाराव जी द्वारा भारत की संतान पर विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई थी| इस कार्यक्रम में उपस्थित शिविरार्थियों द्वारा भारत की धरोहर समान विविधता में एकता के संदेश को प्रस्तुत करते हुए विभिन्न राज्यों की परंपरा को प्रस्तुत किया गया|

सुगन बरंठः श्रीमान सुगन बरंठ ने विनोबा भावे द्वारा किये गये भूदान आंदोलन के व्यवस्थापन के पहलू को शिविरार्थियों के सामने प्रस्तुत किया| लाखों एकड़ जमीन प्राप्त कर भूमि हीन परिवारों को यह भूमि प्रदान कर समानता पर आधारित समाज की स्थापना करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है| इस प्रस्तुति में शिविर्रार्थियों ने यह पाया कि त्याग और समर्पण की भावना आधारित जीवन से सामाजिक परिवर्तन की परिभाषा को सार्थक कर सकते हैं| यह पदार्थ पाठ भूदान आंदोलन द्वारा सिद्ध होता है|

जॉन चेल्लदूरैः इस कैंप के दौरान डॉ. जॉन चेल्लदूरै द्वारा तीन प्रस्तुति कि गई थी| उनमें पहली प्रस्तुति में नेतृत्व के प्रकार को दर्शाया गया था| उनमें मुख्यतः लोकतांत्रिक (डेमोक्रेटिक), परीवर्तनकारी (ट्रान्सफॉर्मेशनल), परोपकारी (बेनेवॉलंट), एकतंत्रीय (ऍटोेक्रेटिक), दूरदृष्टा (व्हिजनरी), रणनितीकारक (स्ट्रॅटेजिक), सुविधाकारी (फॅसिलिटेटिव्ह) आदि नेतृत्व की शैली पर डॉ. जॉन ने प्रकाश डाला|

दूसरा सत्र - गॉंधीजी के जीवन में दक्षिण अफ्रीका का काल अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा| क्योंकि यह वही दौर था जब सामान्य मोहन से महात्मा तक की सफर में अपने आपको समर्पित कर दिया था| इन घटनाओं में मोहनदास गॉंधी के नेतृत्व की झलक प्राप्त होती है| डॉ. जॉन ने सत्याग्रह के बारे में अपनी बात रखते हुए कहा कि गॉंधीजी सत्य और

अहिंसा के तत्त्वोंे को इस प्रकार प्रयोग में लाए जैसे वे मानव उन्नति के लिए एक अमोघ साधन बन गये| उनके लिए रास्ता ही मंजिल था, इसलिए उन्होंने साध्य को केंद्र में रखने की बजाय साधन को केंद्र में रखा|

डॉ. जॉन ने दक्षिण अफ्रीका की अत्यंत रोचक घटनाओं के साथ

उदाहरण को प्रस्तुत किए जिससे शिविरार्थियों को एक उमदा प्रस्तुति का अनुभव हुआ|

तीसरा सत्र - डॉ. जॉन ने शांति व संघर्ष को प्रस्तुत करते हुए कहा कि ये दो शब्द हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं| उनको नजरंदाज करके हमें आगे बढ़ना संभव नहीं है| हॉं, यह संभव है कि संघर्ष को सकारात्मक रूप में तबदील कर हम उनको अवसर में बदल सकते हैं| इस सत्र में शिविरार्थियों ने संघर्ष के विभिन्न पहलुओं को सकारात्मक रूप में समझा और उनको व्यवहारिक संदर्भ में देखने का प्रयास किया|

शांति संबंधित खेलः शिविर के दौरान हर रोज एक सत्र खेल के लिए घोषित किया गया था| उस सत्र में विभिन्न खेलों के माध्यम से मूल्य को बढ़ावा देना एवं उनकी समझ प्राप्त करने का प्रयास किया| इस सत्र में शिविरार्थियों को एक दूसरे से परिचित करवाने के लिए विभिन्न तरह के खेलों का सहारा लिया गया| हर रोज नए अंदाज में खेल को प्रस्तुत करने के लिए डॉ. जॉन, डॉ. सुदर्शन आयंगार, अश्विन झाला एवं सुब्बाराव जी ने अपना योगदान प्रदान किया|

समापन कार्यक्रमः समापन कार्यक्रम में जैन इरिगेशन सिस्टिम्स लि. के सह व्यवस्थापकीय संचालक अतुल जैन, डॉ. सुदर्शन आयंगार, डॉ. एस. एन. सुब्बाराव, गॉंधियन सोसायटी के भद्रभाई बुटाला और फाउण्डेशन के संचालक मंडल के सदस्य सेवादास दलीचंद ओसवाल उपस्थित थे| पंद्रह दिन चले इस कैंप की गतिविधियों पर फाउण्डेशन के अश्विन झाला तथा डॉ. जॉन ने प्रकाश डाला, डॉ. सुदर्शन आयंगार ने कैंप के विषय व उनकी पृष्ठभूमि के संदर्भ में अपने मनोगत व्यक्त किए| कुछ शिविरार्थियों द्वारा अपने अनुभव साझा किए गए तथा डॉ. सुब्बाराव जी ने युवा गीत के माध्यम से कैंप का समापन किया|

गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन एवं गॉंधियन सोसायटी के द्वारा देश के विभिन्न राज्यों से उपस्थित शिविरार्थियों के लिए यह कैंप निशुल्क आयोजित किया गया था| जिसमें निवास व्यवस्था, भोजन व्यवस्था, आवश्यक साहित्य तथा गॉंधीजी की आत्मकथा, क्षेत्रीय दौरा तथा सभी शिविरार्थियों के लिए रेलवे शयन यान का किराया प्रदान किया गया|

इस कैंप के दौरान जलगॉंव जिलाधिकारी श्रीमान् किशोरराजे निंबालकर तथा डॉ. युगल रायलु, श्री. सुरेश पांडे, डॉ. मॅथ्युज, डॉ. जगदिश पाटील आदि मान्यवरोंने कैंप को भेंट देकर सहभागियों के साथ मुलाकात की| इस कैंप को सफल करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले लोगों में गॉंधियन सोसायटी के श्रीमान् भद्रभाई बुटाला, फाउण्डेशन के संचालक मंडल के सदस्य डॉ. सुदर्शन आयंगार, फाउण्डेशन के समन्वयक उदय महाजन, फाउण्डेशन के डीन डॉ. जॉन चैल्लदूरै, विनोद रापतवार, नितीन चोपडा, सुधीर पाटील एवं अश्विन झाला का योगदान रहा|

शिविर में आए हुए शिविरार्थियों के अभिमतः

शिविर में उपस्थित सभी शिविरार्थियों के लिए यह एक उमदा अनुभव के साथ साथ गॉंधीजी के जीवन दर्शन को समझने के लिए एक महत्त्वपूर्ण कैंप बना, यह शिविरार्थियों के अभिमत से ज्ञात होता है| उनमें से कुछ अभिमत यहॉं पर प्रस्तुत कर रहे हैं|

ध्रुव (गुजरात) आज के दौर में सामुदायिक तनाव बढ़ रहा है और मानवीय संवेदनशीलता कम होती जा रही है| मैं आज से इस मानवीय संवेदनशीलता को नया मोड़ देना चाहूँगा और यह करके दिखाऊँगा|

इनसाफ़ खान (राजस्थान) मानवता का विकास, भौतिक धन महत्त्वपूर्ण नहीं है| स्व-अभिविन्यास का मर्म मैंने यहॉं पर सीखा है|

आनंद (मध्यप्रदेश) मुझे अपने जीवन के लिए सही दिशा मिल गई|

दिव्या (केरल) मैंने अपने छात्रपन को यहॉं जागृत होते हुए देखा है| आवश्यक है उतना ही भोजन प्राप्त करूंगी, उनको बरबाद नहीं करूंगी|

अनवर (केरल) मैंने गॉंधीजी को समझा, मेरा मानना है कि हम सब साथ मिलकर एक उमदा राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं| मुझे लगा मैंने गॉंधीजी के साथ १५ दिन बिताए|

तेजस्वी (महाराष्ट्र) इस शिविर ने मुझे समाज को समझने में मदद की| इस कैंप से मैं अपने पिताजी को अधिक नजदीक से समझ पाया हूँ|

फरहात खातुन (बिहार) मैं एनसीसी की लीडर रही हूँ| किन्तु पहली बार मानवीय भावना की समझ मुझे इस शिविर के माध्यम से प्राप्त हुई| गॉंधीजी को समझ पाई| महत्त्वपूर्ण शिक्षा का संचार हुआ है, और मैं अपने आपको अच्छा महसूस कर रही हूँ|

सोम्या (तमिलनाडु) पहला दिन मुझे पानी में से निकाली मछली की तरह लगा| किन्तु बाद में अच्छा महसूस हुआ| मैं अपनी नीरसता से बाहर रहने के लिए यहॉं आई थी, लेकिन मेरे लिए यह शिविर एक महान

अनुभव बन गया| ‘आत्म-केंद्रित’ नहीं होना यह सबक है जो मुझे यहॉं से मिला है|

डमरू (उडीसा) श्रम की प्रतिष्ठा का मंत्र मैंने इस शिविर से प्राप्त किया है और इसे मैं आगे भी जारी रखूंगा|

रविदास चौधरी (मध्य प्रदेश) मैं यहॉं एक संस्था के कार्यकर्ता के रूप में आया था| अब मैं यहॉं से एक रचनात्मक कार्यकर्ता बनकर जा रहा हूँ|

भानु प्रताप राय (उत्तर प्रदेश) मुझे लगता है कि अब मैं मानव के रूप में कुछ कदम आगे हूँ; मैं गांँधीजी को बहुत करीब से देख सकता हूँ|

भाभाशंकर महंतो (उडीसा) मैं संवेदित हूँ, अब मैं देश की पीड़ा को और अधिक बारीकी से देखता हूँ| मैंने यहां नेतृत्व का उमदा उदाहरण देखा है| मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा|




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