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Articles - डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम गॉंधी तीर्थ में

दिनांक २१ मई २०१४ को ‘प्रोगेसिव फार्मर्स एण्ड साइन्टिस्ट’ विषय पर महाराष्ट्र के प्रगतिशील किसानों को अपना उद्बोधन देने हेतु भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम गॉंधी तीर्थ स्थित गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन में पहली बार पधारे| आपके साथ प्रसिद्ध गॉंधीविद् न्यायमूर्ति चन्द्रशेखर धर्माधिकारी, भाभा आणिवक अनुसंधान केन्द्र के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोडकर तथा उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुधीर मेश्राम भी उपस्थित थे| सर्वप्रथम आपने गॉंधी तीर्थ पर राष्ट्रपिता महात्मा गॉंधी की विशाल प्रतिमा को पुष्पांजलि अर्पित की और पश्चात् एक वट-वृक्ष का वृक्षारोपण किया| उसके बाद आपने अत्याधुनिक दृश्य और श्रौव्य तकनीक से सुसज्जित फाउण्डेशन परिसर स्थित ‘खोज गॉंधी की’ संग्रहालय का अवलोकन किया| तत्पश्चात् डॉ. कलाम ने फाउण्डेशन के प्रेक्षागृह में प्रतीक्षारत महाराष्ट्र के प्रगतिशील किसानों और वैज्ञानिकों को सम्बोधित किया| डॉ. कलाम के अनुरोध पर उनके सम्बोधन के पूर्व संस्था के संस्थापक डॉ. भवरलाल जैन ने गॉंधी तीर्थ की स्थापना की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि ‘मैं अपने आपको बहुत खुशनसीब मानता हूं कि व्यवसाय से मैंने जो प्राप्त किया उसे समाज कार्य में लगाने का मौका मुझेे मिला| हमनें गॉंधी तीर्थ की स्थापना इस उद्देश्य के साथ की ताकि लोग गॉंधीजी के विचारों को पढ़कर यह जान सकें कि जीवन कैसे जिया जाता है, ताकि यह भव्य स्मारक हमारी अगली पी़ढ़ी को यह हमेशा स्मरण दिलाती रहे कि हम समाज से जो लेते हैं, वह समाज को हमें लौटाना है| क्योंकि जब हम समाज के लिये कोई कार्य करते हैं तो हम समाज पर कोई उपकार नहीं करते बल्कि इसके विपरीत हमें समाज का कृतज्ञ होना चाहिये कि समाज ने यह कार्य करने के लिये हमें अवसर दिया है’’|

किसानों और वैज्ञानिकों के अपने सम्बोधन में डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने कहा कि मैं मुख्य रूप से यहां जैन इरिगेशन सिस्टम और जैन तीर्थ देखने आया था जिसे देखकर मैं अभिभूत हूँ| संग्रहालय देखकर गॉंधीजी की स्मृतियॉं जीवित हो गयीं| उन्होंने बताया कि २००५ में मैं जब एक दौरे पर दक्षिण अफ्रीका गया तो डर्बन में वहां के गवर्नर ने मुझसे कहा कि मैं आपको एक ट्रेन देता हूं जो आपको पीटरमारित्सबर्ग स्टेशन ले जायेगी जहां गॉंधीजी के साथ दुर्व्यवहार हुआ था| मैं प्रथम श्रेणी में यात्रा कर पीटरमारित्सबर्ग पहुंचा| वहां एक विशाल स्टेच्यू बनाकर जिस रूप में हमारे राष्ट्रपिता को सम्मानित किया गया है, देखकर मैं अभिभूत हो गया और वहां के लोगों को मैंने प्रणाम किया| यहॉं गॉंधी तीर्थ आकर बहुत अच्छा लगा| यह एक ऐसा पवित्र स्थान है जहां एक अपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति भी आये तो उसका मन पवित्र और परिवर्तित हो जायेगा|

किसानों को उद्बोधित करते हुए डॉ. कलाम ने बताया कि मैं महाराष्ट्र के एक आदर्श गॉंव वार्ना वैली गया था| वहॉं के मि. विनायकराव कोरे से मिला| वहॉं ६९ गॉंवों के कुल ६०,००० किसान कार्य करते हैं जहॉं वे दूध के उत्पाद, गेहूं, धान, कपास सबकुछ पैदा करते हैं| वहां कोआपरेटिव एज्यूकेशल इन्स्टीट्यूशन्स हैं| वहां अस्पताल है, स्कूल है, कालेज है, मेडिकल कालेज, शापिंग काम्प्लेक्स आदि सबकुछ है| वहां इन्टीग्रेटेड डेवलपमेंट कोआपरेटिव सोसायटी है जिसमें सभी कार्य करते हैंै| दो लाख से भी अधिक किसानों में से वहां कोई भी व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे नहीं है| मैं गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के डॉ. भवरलाल जैन से आग्रह करता हूं कि वे किसानों की क्षमता का विकास विशेषकर त्रिआयामी ढंग से करें जिसमें १. व्यक्तिगत क्षमता को स्किल डेवेलपमेन्ट अपनाकर बढ़ाना,

२. कृषि पर कार्य कर रहे संस्थानों को मजबूती देना तथा ३.समाज-आर्थिक सिस्टम को योग्य बनाना शामिल हो| जैन इरिगेशन सिस्टम के लोग अवश्य मेरी बात पर ध्यान देंगे| डॉ. कलाम ने बताया कि उनके पिता भी किसान थे जो नारियल और केले की खेती करते थे| कृषि की सहायता से ही मैं अपनी शिक्षा पूरी कर सका| यहां जैन इरिगेशन सिस्टम का जो आधार वाक्य है- ‘कम से कम पानी, कम से काम खाद, कम से कम क्षेत्र और अधिक से अधिक पैदावार’ मुझे बहुत अच्छा लगा| हमारे किसान अधिक से अधिक पानी और अधिक से अधिक खाद का इस्तेमाल करते हैं| किन्तु ड्रिप सिस्टम आज की आवश्यकता है, अर्थात् पौधे के लिए जितना आवश्यक हो उतना ही पानी उसे दिया जाय| तभी हमारे संसाधन और पैदावार दोनों बढ़ेगी|

मैं डॉ. भवरलाल जैन से अनुरोध करूंगा कि वे एक हजार किसानों की एक कार्यशाला आयोजित करें और लोगों को बतायें कि कैसे ‘प्रिसीजन फार्मिंग’ की जाती है| डॉ. भवरलाल जैन ने उन्हें कार्यशाला आयोजित करने का आश्वासन दिया|

इस अवसर पर संस्था के निदेशक मंडल के सदस्य सर्वश्री दलीचन्द जैन, अशोक जैन, डॉ. डी. आर. मेहता तथा अजित जैन, अतुल जैन तथा गॉंधी रिसर्च फाउन्डेशन के पदाधिकारी एवं सहकारीगण तथा शहर से आये अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे|

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