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Articles - दो दिवसीय ‘सहजीवी शान्ति ’ कार्यशाला सम्पन्न

दिनांक ५-६ मई २०१४ को गॉंधी रिसर्च फाउन्डेशन के सभागार में दो दिवसीय ‘सहजीवी शान्ति’ कार्यशाला का आयोजन फाउण्डेशन के सहकारियों के लिये किया गया| ‘जीवन सत्य रूपी ईश्वर का वास्तविक साक्ष्य है| जीवन को विकसित करने वाला कोई भी कार्य या सोच जो सत्य के साथ सतत् जुड़ी हुई है, उसे अहिंसा कहा जाता है तथा जो जीवन को विनाश की ओर ले जाने सहायक है वह सत्य का नकारात्मक पक्ष है, इसलिये वह हिंसा है|’

गॉंधीजी के इस सन्देश को केन्द्र में रखकर ‘सहजीवी शान्ति’ कार्यशाला यह समझने के उद्देश्य से आयोजित की गयी कि हम किस प्रकार परस्पर एक दूसरे के जीवन को सुरक्षित, संवर्धित और संरक्षित करते हुए अपने दैनिक जीवन में शान्ति का अनुभव कर सकते हैं| इस परस्पर संवादात्मक कार्यशाला में फाउण्डेशन के २० प्रतिभागियों ने भाग लिया| कार्यशाला के दौरान डॉ. डी. जॉन चेल्लदुरै एवं श्री अश्विन झाला ने विभिन्न गेम और अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को शान्ति कैसे प्राप्त की जा सकती है, शान्ति के मुख्य अवयव क्या हैं, तथा वह कौन सी सामाजिक, आर्थिक, नैतिक, मनोवैज्ञानिक, राजनैतिक तथा पर्यावरणीय परिस्थितियां हैं जो व्यक्ति तथा समाज के लिए शान्ति का नियमन या व्यवस्थापन करती हैं, इन विषयों पर अपना मन्तव्य स्पष्ट किया| डॉ. चेल्लदुरै ने बताया कि सामाजिक ढांचे के विश्लेषण द्वारा व्यक्ति और समाज के बीच स्थापित अन्त: सम्बन्ध यह बताता है कि शान्ति एक परस्पर सापेक्ष अनुभव है जो किसी पात्र में रखे जल में विक्षोभ उत्पन्न करने पर उत्पन्न आगे और पीछे चलनेवाली सघन लहरों के समान अनुभव किया जा सकता है| शान्ति सापेक्ष और अनुभवजन्य हैं|

प्रतिभागियों ने कार्यशाला को अत्यन्त उपयोगी बताते हुए इसे क्रमश: शान्ति-कार्यकर्ता और शिक्षक वर्ग के लिये अलग-अलग आयोजित करने की मांग की|

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