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Articles - चरखे की जरूरत को समझने की आवश्यकता है - सोनम वांगचुक

३१ दिसम्बर २०१७ को गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के प्रांगण में श्रीमान सोनम वांगचूक का व्याख्यान आयोजित किया गया था| सुबह सामूहिक प्रार्थना में आयोजित इस व्याख्यान में श्रीमान वागंचुक ने कहा कि अगर हम वर्तमान समय में बुद्ध, महावीर या गॉंधीजी के विचारों को पूनर्परिभाषित नहीं करेंगे तो मुझे लगता है कि यह संकट की स्थिति होगी| पुराने विचार का संदर्भ आज भी मौजूद है उनको हम आज के समय में समझने की आवश्यकता है| अहिंसा को आज के संदर्भ में कैसे देखा जाए| आज हम इंसान को किस तरह देखें जैसे बुद्ध ने देखा गॉंधीजी ने देखा| आज के संदर्भ में हम उन विचारों पर गौर करेंगे तो पता चलेगा की हम कितने हिंसक बने हुए है|

वर्तमान में हिंसा का स्वरूप बदल गया है| अगर हम इंटरनेट पर मृत्यु के कारण देखें तो हत्या या खून २६ वें नंबर पर है| इससे पहले २५ कारणों में हमारी जीवनशैली आती है, हम जब अपने स्वरूप को देखेंगे तो गभराहट होगी की आज हम कितने हिंसात्मक हो गए है| पृथ्वी पर अपना अस्तित्व रखनेवाली वन्य प्राणी की ५२ प्रतिशत जाती लुप्त हो चुकी है और यह केवल पिछले ४० साल में हुआ है| जिसको बनाने में प्रकृति को करोड़ो साल लगे उसे लुप्त करने में हमने ४० साल ही लगाऐ| अगर ऐसी स्थिति रही तो आने वाले कुछ समय में वन्य जीवन नष्ट हो जाएगा|

आज की हिंसा युद्ध से नहीं झघडे से नहीं बल्कि यूं कहे की हम जो इस्तेमाल कर रहे है उनसे होती है| भौतिकवाद की इस दौड में हमें संतुष्टि ही नहीं हो रही है, हम अपने आपके स्वरूप को विशाल ही बनाते जाते है|

इसलिए हमें गॉंधीजी और बुद्ध की अहिंसा के तत्व को आज के संदर्भ में उतारने की आवश्यकता है| हम अपने आप को शांति प्रिय मानते हैं तो फिर से सोचने की बात है| हमारे पास वैकल्पिक तकनीक है उनको बढ़ावा देना है| हम ईंधन के माध्यम से प्रदुषण फैला कर तापमान को बढाते है, बल्कि इसे प्रयोग में लाने की जगह हमें सौर ऊर्जा का प्रयोग करना चाहिए|

मैं मानता हूँ कि हमारी जरूरत है उस हिसाब से हमें संसाधन का प्रयोग करना चाहिए| एक समय आयेगा जब हम चरखे की जरूरत और उनके महत्व को समझेंगे तब हम अपने आपको प्रस्थापित करेंगे| हमारे धर्म में जो स्थान अहिंसा का है वह स्थान हमारी जीवनशैली में आना चाहिए|

उक्त व्याख्यान में फाउण्डेशन के कार्यकर्ता उपस्थित थे| श्रीमान वांगचुक का परिचय एवं समापन अश्‍विन झाला ने किया|

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