Gandhi Research Foundation

Articles - संगीत के द्वारा शांति की अनुभूति-प्रो. मार्क लिंडले

संगीत के सुरों को किसी का बंधन नहीं होता, वे सुर हृदय के अंतर्मन तक पहुँच जाते हैं| जब जब अपने अंतर्मन को झांकने की बात होती है संगीत सबसे अच्छा जरिया बन जाता है| ऐसी ही कुछ बात जलगॉंव स्थित भाऊ के उद्यान में दि. १४ अक्टूबर २०१७ गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा आयोजित ‘म्यूजिक फॉर पीस’ कार्यक्रम में हुई| अमेरिका के प्रो. मार्क लिंडले ने अपनी अनोखी शैली में सिंथेसायजर पर इतने बेहतरीन सुर छेड़े कि सुनने वाले मंत्र मुग्ध हो गए| हमारे पाठक वर्ग जानते ही होंगे की अमेरिका से आए प्रो. मार्क लिंडले अपना महत्त्वपूर्ण समय गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन में बिताते हैं| प्रो. मार्क अर्थशास्त्र के विद्वान हैं साथ-साथ संगीत विद्वान के रूप में भी जाने जाते हैं| प्रो. लिंडले गॉंधी विचार को जपने वाले और जीने वालों में से हैं, वैसे ही संगीत के भी वे पुजारी हैं| उन्होंने जर्मनी के प्रसिद्ध संगीत विद्वान जॉन सेबॅस्टीयन बाख कि की-बोर्ड की रचना का स्वतंत्र रूप से अभ्यास किया है| भाऊ के उद्यान में प्रो. मार्क लिंडले ने करुणा, शांति और आनंद की ऐसी तरंगें छेड़ी की श्रोता वर्ग मोहित हो गए| इस महफिल में उन्होंने बाख की दस रचनाओं को सादर प्रस्तुत किया| यीशु को शूली पर चढाए जा रहे थे उस वक्त हृदय को पिघला देने वाली करुण वेदना को उन्होंने सिंथेसायजर पर प्रस्तुत कर रसिकों को करुण रस का अहसास करवाया| प्रो. मार्क द्वारा प्रस्तुत संगीत ने शांति की अनुभूति करवाई, यूं कहें उनके द्वारा दिया गया शीर्षक ‘म्यूजिक फॉर पीस’ सही मायने में सार्थक हुआ|

उक्त कार्यक्रम में प्रस्तावना एवं प्रो. मार्क लिंडले का परिचय फाउण्डेशन के विनोद रापतवार ने प्रस्तुत किया| गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के संचालक मंडल के सदस्य दलीचंद जैन ने गॉंधी विचार एवं डॉ. भवरलालजी जैन के द्वारा किया गये प्रयास के बारे में अपनी बात रखी| इस कार्यक्रम में फाउण्डेशन के डीन डॉ. जॉन चेल्लदूरै, आशुतोष कुमठेकर, अशोक चौधरी, समाज कार्य स्नातकोत्तर अभ्यासक्रम के छात्र एवं जलगॉंव शहर के संगीत रसिक बड़ी मात्रा में उपस्थित थे|

Back to Articles


Address
Gandhi Teerth, Jain Hills, PO Box 118,
Jalgaon - 425 001 (Maharashtra), India
 
Contact Info
+91 257 2260033, 2264801;
+91 257 2261133
© Gandhi Research Foundation Site enabled by : Jain Irrigation Systems Ltd