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Articles - ‘गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा’ के लिये कायिक निधि निर्माण करने का प्रयास

डॉ. आम्बेडकर की १२६ वीं जन्म जयंती मनाई गयी

१४ अप्रैल, डॉ. बी. आर. आम्बेडकर की जन्म जयंती है| इस उपलक्ष में गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के गॉंधी तीर्थ परिसर पर सुबह सामूहिक प्रार्थना में डॉ. आम्बेडकर के जीवन और कार्य का परिचय प्रस्तुत किया गया| पिछड़े समुदाय का उद्धार करने वाले डॉ. आम्बेडकर के जीवन की प्रमुख घटनाओं पर प्रकाश डाला गया| उन्होंने अपने जीवन में जो संघर्ष व अपमान की अनुभूति झेली है उनको याद करते हुए उनके योगदान की गाथा को फाउण्डेशन के कार्यकर्ताओं ने प्रस्तुत किया|

फाउण्डेशन के कार्यकर्ता कोमल शिंदे ने डॉ. आम्बेडकर के जीवन की प्रमुख घटनाओं के साथ उनके संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा हमारे जीवन में परिवर्तन का मुख्य आधार है| यह हमें डॉ. आम्बेडकर के जीवन से प्राप्त होता है| शीतल जैन ने डॉ. आम्बेडकर का छात्र जीवन को प्रस्तुत करते हुए कहा कि वे विपुल प्रतिभा के छात्र थे| उन्होंने विश्व की प्रमुख विश्वविद्यालयों जैसे मुंबई विश्वविद्यालय, कोलंबिया विश्वविद्यालय, लन्दन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से शिक्षा प्राप्ति की थी| चंद्रशेखर पाटील ने अपनी अभिव्यक्ति में कहा कि डॉ. आम्बेडकर ने सामाजिक परिवर्तन की नींव प्रस्थापित की, उन्होंने हिन्दू धर्म को नया मुकाम पर पहुंचाने का कार्य किया है| बौद्ध धर्म में उनका धर्मान्तरण एक शुद्ध भावना का प्रतीक बना| क्योंकि उन्होंने धर्मान्तरण करने से पहले कहा था कि मैं ऐसा धर्म अंगीकार करूंगा जो मूलतः भारत और भारतीय संस्कृति से जुड़ा हो और जिसमें हिन्दू धर्म के तत्त्व हो| कार्यकर्ता नरेन्द्र चौधरी ने कहा कि वह एक जाने-माने राजनीतिज्ञ और न्यायविद थे| छुआछूत और जाति-आधारित प्रतिबंधों जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए उनकी ओर से किए गए प्रयास उल्लेखनीय हैं| सीमा तडवी ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि डॉ. बी.आर. आम्बेडकर एक बड़े विद्वान, वकील और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने लाखों की संख्या में महार नामक अछूत जाति के लोगों के साथ मिलकर महाराष्ट्र के रायगढ़ में सत्याग्रह किया| जो सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बना| डॉ. जॉन चैल्लदूरै ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले हजारों सालों से पीड़ित व पीछड़े वर्गों की आवाज़ कोई नहीं बना था| प्रयास किये गये है पर वे परिवर्तन ला सके वैसे नहीं बने| पहली बार ऐसा हुआ डॉ. आम्बेडकर ने अपनी शिक्षा के जरिये यह साबित कर दिया की शिक्षा सभी का अधिकार है| ऐसा कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि वे प्रखर परिवर्तन के प्रतीक बनें और ऐशिया में एक प्रबल क्रान्ति का निर्माण किया| नागरिकत्व की शिक्षा में उन्होंने उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया, संविधान में उनका योगदान बहुमूल्य रहा| सविता महाकाल ने नारी उत्थान में उनके प्रयास की गाथा को प्रस्तुत किया| संतोष भिंताडे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि डॉ. आम्बेडकर अपने जीवन व विचार के माध्यम से भारतवर्ष के लिये आदर्श बने| उनके विचारों पर आचरण करके हम नया भारत का निर्माण कर सकते हैं|

अश्विन झाला ने कहा कि उस वक्त भी गॉंधीजी और आम्बेडकर की आवश्यकता थी और आज भी उनके विचारों की आवश्यकता है| कोई पहलू पर उनके विचार भिन्न थे इसका मतलब यह नहीं की आज भी उनको चर्चा का विषय बनाया जाये| उन दोनों में कई साम्यता भी थी हमें उनके बारे में बात करनी चाहिये| अहिंसा की नींव पर दोनों एक थे, पिछड़ों के कल्याण व महिला उन्नति में दोनों के विचार समान थे| दक्षिण अफ्रीका में जिस सत्याग्रह की नींव गॉंधीजी ने रखी थी, उसी तत्त्वदर्शन पर सन् १९२७ में डॉ. आम्बेडकर ने महाड़ सत्याग्रह किया था| डॉ. भीमराव आम्बेडकर का जीवन संघर्ष और सफलता की ऐसी अद्भुत मिसाल है जो शायद ही कहीं और देखने को मिले|

गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के समन्वयक उदय महाजन ने अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय को स्पर्श करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्रीय नेता को उन्होंने अपने जीवन में किये कार्यों के बारे में उनको याद किया जाना चाहिये, नहीं की उनकी आलोचना के आधार पर| हमें व्यक्तियों की तुलना करने की बजाय उनके विचार को आचरण में लाने का प्रयास करना चाहिये| भूतकाल में वह परिस्थिति तथा समय में घटी घटना को अभी हम न्याय नहीं दे सकते| इसलिए इतिहास को हमें सकारात्मक दृष्टि से देखना चाहिये| गॉंधी तीर्थ परिसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का सूत्र-संचालन अश्विन झाला ने किया|

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