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Articles - चंपारण सत्याग्रह की शताब्दी वर्ष पर विशेष व्याख्यान

कार्यक्रम के दूसरे चरण में १९१७ में महात्मा गॉंधी द्वारा किया गया चंपारण सत्याग्रह का इसी साल शताब्दि वर्ष हो रहा है| चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष के अवसर पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया था| ‘ग्रामविकास की शुरुआत गॉंधीजी का चंपारण सत्याग्रह’ इस विषय पर डॉ. अरुण खोरे मुख्य वक्ता के रुप में उपस्थित रहे| डॉ. खोरे विविध वृत्तपत्रों में पत्रकार से संपादक का कार्य किया है| आपने मराठी भाषा में कई किताबों का लेखन व संपादन कार्य किया है| और गॉंधीजी के मौलिक विचार का संग्रह के रुप में एक पुस्तिका का भी संपादन कार्य किया है| कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. खोरे ने चम्पारण सत्याग्रह के बारे में विस्तृत जानकारी श्रोताओं के सामने रखी| उन्होंने बताया की उनके बचपन में गॉंधीजी के चित्रवाला का एक पोस्ट-कार्ड आता था| उसमें एक संदेश लिखा हुआ रहता था ‘अस्पृश्यता मानवता के प्रति अपराध है|’ और इसी अस्पृश्यता और नई तालीम शिक्षा के मूलभूत कार्य की शुरुआत गॉंधीजी ने चम्पारण से की थी| यह किसानों के लिये किया गया भारत वर्ष का पहला आंदोलन था, और इसी से प्रेरणा लेकर आज भी किसानों के कई आंदोलन चल रहे है| आज पूरे देशभर में जो ‘स्वच्छ भारत’ आंदोलन चलाया जा रहा है, उसकी शुरुआत भी गॉंधीजी ने चम्पारण में ही की थी| डॉ. खोरे ने कहा कि गॉंधीजी ने एक अनमोल संदेश दिया और वह है ‘मेरा जीवन ही मेरा संदेश है|’ यह संदेश विसंवादीतता दूर करने का है, यह संवाद समानता का है, इनकी फलश्रृति के पीछे सत्याग्रह की भूमिका रही थी| गॉंधीजी का चंपारण सत्याग्रह अहिंसा की नींव पर रची बुनियाद का सत्याग्रह है| और इसी सत्याग्रह ने रचनात्मक ग्राम विकास की संकल्पना का निर्माण किया|

इस कार्यक्रम का अध्यक्षीय भाषण डॉ. के.बी.पाटील ने प्रस्तुत किया| १९६९ में गॉंधी जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रकाशन विभाग द्वारा एक किताब प्रकाशित की गई थी| उनमें कई प्रसिद्ध व्यक्तियों के लेख समावेश किये गये थे| उनमें से एक लेख में लिखी घटना को डॉ. के. बी. पाटील ने प्रस्तुत किया| उन्होंने कहा कि ‘१९४० का समय द्वितीय महायुद्ध की शुरुआत थी, जर्मनी के साहित्य पुरस्कार विजेताओं ने देश छोड़ दिया था| बड़े बड़े साहित्यकारों के ग्रंथ रास्ते पर फेंके गये थे| उस समय रवीन्द्रनाथ टैगोर यूरोप में थे, वे प्रचंड आश्वस्त हो गये थे| उन्होंने विश्व के प्रसिद्ध तत्वचिंतको को खत लिखा कि विश्व जिस दौर से गुजर रहा है| उसे देखकर ऐसा लगता है कि मानवता का भविष्य अंधकारमय है| यह स्थिति के लिये हम कुछ कर सकते हैं क्या? उनके प्रत्युत्तर भी मिले उसमें एक प्रत्युत्तर ऐसा था कि आज का चित्र खराब ही है, किन्तु मानवता के भविष्य की बात हो तो उनकी कोई चिंता करने की आवश्यकता नहीं है| उस लेख में लिखा था, ना ही काले शर्ट वाले मुसोलिनी के हाथ में, और ना ही भूरे शर्ट वाले हिटलर के हाथ में मानवता का भविष्य होगा| बल्कि बिना शर्ट वाले गॉंधी के हाथ में मानवता का भविष्य निर्धारित होगा|’ यह घटना दर्शा रही है कि १९४० के समय में भी गॉंधीजी के प्रति इतना विश्वास इस विश्व को था| पिछले एक सहस्र में जिनका वैश्विक प्रभाव रहा ऐसे करीब एक हजार लोगों का अभिप्राय प्राप्त किया गया| उस हजार में से आठ सो लोगों से भी ज्यादा लोगों ने गॉंधीजी के नाम का जिक्र किया था| डॉ. के. बी. पाटील ने युवाओं को यह आह्वान करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को गॉंधीजी के बारे में पढ़ना चाहिये| उक्त कार्यक्रम जलगॉंव के कांताई सभागृह में आयोजित किया गया था|

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