Gandhi Research Foundation

Articles - गॉंधी निर्वाण दिन पर ग्रंथ विमोचन एवं व्याख्यान कार्यक्रम

३० जनवरी गॉंधी निर्वाण दिन के उपलक्ष्य में फाउण्डेशन के द्वारा दो कार्यक्रम आयोजित किये गये थे| किताबों का विमोचन तथा सार्वजनिक व्याख्यान| कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं महात्मा गॉंधी की प्रतिमा को पुष्प अर्पित कर किया गया| उपस्थित महानुभावों तथा श्रोतागण के द्वारा मौन रखकर महात्मा गॉंधी को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी|

ग्रंथ विमोचन कार्यक्रम

स्व. नारायणभाई देसाई ने भारत और पाकिस्तान के विभाजन से सम्बन्धित मुद्दों पर, अधिकृत जानकारी द्वारा ‘जीगरना चीरा’ किताब लिखी है| तथा गॉंधीजी और उनके तत्वदर्शन को विस्तृत रुप से समझने के लिये ‘सौना गॉंधी’ किताब लिखी है| यह दो ग्रंथ मूलतः गुजराती भाषा में है| श्रद्धेय नारायणभाई देसाई के कई सारे ग्रंथों का मराठी अनुवाद डॉ. विश्वासराव पाटील ने किया है| डॉ. पाटील ने ‘हृदयाची फाळणी’ तथा ‘कालजयी गॉंधीजी’ शीर्षक से उपरोक्त दर्शाये गये दो ग्रंथ का मराठी अनुवाद किया है| और गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन ने इस दो ग्रंथ को प्रकाशित किया है| इस दो ग्रंथ का विमोचन कार्यक्रम आज ही के दिन किया गया| उत्तर महाराष्ट्र विद्यापीठ के पूर्व कुलनायक डॉ. के. बी. पाटील, गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के संचालक दलुभाऊ जैन तथा अशोक जैन, वरिष्ठ पत्रकार व संपादक, डॉ. अरुण खोरे तथा वरिष्ठ लेखक डॉ. विश्वासराव पाटील के द्वारा प्रस्तुत दो ग्रंथों का विमोचन किया गया|

इस कार्यक्रम में फाउण्डेशन के संचालक अशोक जैन ने प्रास्ताविक प्रस्तुत किया| उन्होंने कहा कि महात्मा गॉंधी ने दिये हुए तत्वदर्शन आज भी मानवता को प्रेरित करता है| डेशमंड टुटु, ठाकुरदासजी बंग, घनश्यामदास बिड़ला, जमनालालजी बजाज, अप्पासाहेब पटवर्धन, बाबा आमटे, श्रीलंका के गॉंधी से परिचित डॉ. ए. टी. आर्यरत्ने, एलन डगलस, मेक्सिको के फर्नान्डो रिवेरा फरेरो, डॉ. प्रकाश आमटे, डॉ. अभय बंग ऐसे कई अनगिनत नामों की यह श्रृंखला है, जो गॉंधीजी की विरासत को संभाले है| गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के संस्थापक डॉ. भवरलालजी जैन को याद करते हुए कहा कि अपने जीवन के दौरान कृषि, किसान, ग्रामोदय, शाश्वत विकास को अपनी कृति के माध्यम से बड़े भाऊ ने सार्थक किया| उन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की संस्था गॉंधी तीर्थ का निर्माण किया| उतनी ही लगन और मेहनत से जैन परिवार इस कार्य को आगे बढ़ा रहें है|

प्रकाशित किताबों के बारे में अपने मनोगत व्यक्त करते हुए डॉ. विश्वास पाटील ने कहा कि, नारायणभाई देसाई इस जगत में गॉंधीजी पर भाष्य करनेवाले आखिरी व्यक्ति थे| गॉंधीजी के चले जाने के बाद आज ६९ साल के बाद भी हमें गॉंधीजी को क्यों पढना चाहिये? क्यों उनके विचार व आचार को ध्यान में रखना चाहिये? अगर हमें कोई कहे कि हम २४ घंटे कैसे जीये यह बताना है तो भी हम नहीं बता पायेंगे| कहने जैसी बात तो नहीं कहेंगे फिर छिपाने जैसी बात का तो सवाल ही नहीं है| गॉंधीजी ने अपनी न कहने योग्य बात भी कही है, इससे पता चलता है कि वे सत्य के साधक थे| गॉंधीजी संभावना को भी पार कर गये| गॉंधीजी प्रासंगिक या अप्रासंगिक, यह चर्चा केवल भारत में ही है, या जहॉं भारतीय बसे है वहीं पर ही है| यह चर्चा विदेशों में नहीं है| यह प्रश्न न मार्टिन ल्यूथर किंग जू. को हुआ और ना ही ओबामा को हुआ| मार्टिन ल्यूथर किंग ने तो यहॉं तक कह दिया था कि आप अपने ही जोखिम पर गॉंधीजी को अनदेखा कर सकते हैं| उन्होंने कहा कि आत्मसम्पन्न व्यक्ति खड़ा करने के लिये गॉंधीजी की आवश्यकता है| प्रकाशित ग्रंथों का जिक्र करते हुए डॉ. पाटील ने कहा कि यह गौरव की बात है कि भारतीय भाषाओं में नारायणभाई देसाई के द्वारा लिखित साहित्य का अनुवाद हो रहा है| मराठी भाषा में अनुवाद का कार्य गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन समय-समय पर कर रहा है| डॉ. पाटील ने यह दो ग्रंथ श्रद्धेय नारायणभाई तथा श्रद्धेय बड़े भाऊ को स्नेह व कृतज्ञता पूर्वक अर्पित किये|

Back to Articles


Address
Gandhi Teerth, Jain Hills, PO Box 118,
Jalgaon - 425 001 (Maharashtra), India
 
Contact Info
+91 257 2260033, 2264801;
+91 257 2261133
© Gandhi Research Foundation Site enabled by : Jain Irrigation Systems Ltd