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Articles - डॉ. जे. सी. कुमारप्पा की १२५ वीं जन्म जयंती

प्रसिद्ध गॉंधीवादी अर्थशास्त्री डॉ. जे. सी. कुमारप्पा का जन्म ४ जनवरी के दिन तमिलनाडू के तंजावुर में हुआ था| डॉ. कुमारप्पा के योगदान को दृष्टिगत रखते हुये २०१७ में उनकी १२५ वीं जन्म जयन्ती मनाई जा रही है| फाउण्डेशन के द्वारा कुमारप्पा के योगदान को प्रस्तुत करने के लिए वाशिंग्टन से डॉ. मार्क लिण्डले को आमंत्रित किया| मार्क लिण्डले अर्थशास्त्र के विशिष्ट विद्वान हैं और विभिन्न विश्वविद्यालयों में अर्थशास्त्र पढ़ाते रहे हैं| आप आधुनिक भारत के इतिहास, विशेष रूप से स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गॉंधी एवं उसके साथियों के योगदान पर अध्ययन कर रहे हैं| गॉंधियन अर्थशास्त्री जे. सी. कुमारप्पा उनके चयनित विषयों में प्रमुख स्थान रखता है| उनके द्वारा लिखित पुस्तकों में गॉंधी एण्ड ह्यूमेनिज्म, गॉंधी एण्ड द वर्ल्ड टुडे, लिण्डलेज जे सी कुमारप्पा: महात्मा गॉंधीजी ऐज् इकोनोमिस्ट आदि प्रमुख हैं|

फाउण्डेशन द्वारा ४ जनवरी २०१७ के दिन प्रो. मार्क लिण्डले का विशेष व्याख्यान जलगॉंव शहर की प्रमुख दो संस्थाओं में आयोजित किया गया| मूलजी जेठा महाविद्यालय के कॉमर्स विभाग में आयोजित व्याख्यान में डॉ. मार्क लिण्डले ने ‘जे. सी. कुमारप्पा एवं २० वीं शताब्दी का पारिस्थितिक अर्थशास्त्र’ विषय पर प्रकाश डाला| प्रो. मार्क ने कहा की अन्य गॉंधावादियों ने भी उक्त विषय पर अपने-अपने विचार प्रगट किये, किन्तु उनके विचार मुख्यत: आर्थिक वस्तुओं के उचित वितरण पर ही केन्द्रित रहे| जबकि कुमारप्पा ने स्थायी अर्थव्यवस्था एवं पारिस्थितिक मुद्दों को गहराई से प्रस्तुत कर गॉंधीवादी आर्थिक विचारों को और भी व्यापक बनाने का प्रयास किया हैं|

जे. सी. कुमारप्पा ने स्थायित्व की अवधारणा के आधार पर नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय ऊर्जा के प्राकृतिक संसाधनों के बीच में स्पष्ट अंतर निर्धारित किया| पृथ्वी पर जितनी मात्रा में प्राकृतिक संसाधन उपस्थित हैं उनका सही इस्तेमाल करेंगे तभी हम अपने अस्तित्व को सही सलामत रख पायेंगे| प्रो. मार्क ने कहा कि अर्थशास्त्र को समझने के लिये रसायन विज्ञान का अध्ययन करना भी जरूरी है| इस विषय को और स्पष्ट करते हुए प्रो. मार्क ने कहा कि आज नदियों से बालू निकालने की प्रथा ने हमारे पर्यावरण को खतरे में डाल दिया है| नदी की निचली सतह पर बालू की वजह से पानी के प्रवाह की गति कम होती है जिससे जमीन में पानी का रिसाव उचित मात्रा में होता रहता है| जब हम नदी से बालू निकालते हैं तो उसका अर्थ यह है कि पानी के रिसाव की संभावना कम हो जाती है| पानी शीघ्रता से बह जाता है| बालू का निकालना एक दृष्टि से आपदा से कम नहीं है| ऐसी स्थिति में हमें बालू का अध्ययन करने के लिए रसायन विज्ञान की आवश्यकता रहती है| प्राकृतिक खनिज का मूल्य रसायन विज्ञान के आधार पर निकाला जा सकता है इसलिये अर्थशास्त्र और रसायन शास्त्र दोनों एक दूसरे के पूरक है| इस अवसर पर कॉलेज के उप-प्रधानाचार्य डॉ. ए. पी. सरोदे, कॉमर्स विभाग के समन्वयक डॉ. के. पी. नंदनवार तथा कॉमर्स विभाग के छात्र-छात्रायें बड़ी संख्या में उपस्थित थे|

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