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Articles - अहिंसा और शांति विषयक अन्तर्राष्ट्रीय महिला सम्मेलन

२ से ४ अक्तूबर २०१६ में अहिंसा और शांति विषयक अन्तर्राष्ट्रीय महिला सम्मेलन का आयोजन जैन हिल्स स्थित गॉंधी तीर्थ पर किया गया| इस सम्मेलन में भारत और अन्य तीस देशों से शांतिदूत के रुप में सामाजिक कार्य करनेवाली महिलायें पधारी थीं| इसका उद्देश्य जय जगत् २०२० कि दिशा में सार्थक प्रयास के द्वारा एक नेटवर्क का निर्माण करना था| एकता फाउण्डेशन ट्रस्ट भोपाल, इन्टरनेशनल गांधियन इनिसिएटिव फॉर नानवायलेंस एण्ड पीस, मदुराई, गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन, जलगॉंव तथा सीईएससीआय सपोर्ट असोसिएशन (झुरिच) के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित किया गया था|

तीन दिन तक चले इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन कार्यक्रम का उद्घाटन गॉंधी जयंती के दिन जैन हिल्स स्थित गॉंधी तीर्थ पर किया गया था| उद्घाटन समारोह में १२०० से अधिक लोग उपस्थित थे जिसमें २४ देशों से पधारी ४१ महिला शांतिदूत, भारत के १७ राज्यों से करीब २०० ज़मीनी महिला कार्यकर्ता, जलगॉंव की छात्रायें, महिलाऐं तथा आमंत्रित अतिथि समूह उपस्थित थे|

अनुभूति इंटरनेशनल स्कूल की संचालिका श्रीमती निशा जैन ने आगन्तुक प्रतिभागियों का स्वागत किया| वरिष्ठ गॉंधीवादी सर्वोदय नेता श्रीमती कृष्णाम्मल जगन्नाथन ने दीपक जला कर इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया| उपस्थित प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए श्रीमती कृष्णाम्मल ने कहा कि निर्बल व गरीब लोगों को नजरअंदाज किया जा रहा है उनके लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर समानता आधारित समाज की नींव स्थापित करने के लिए हम सबको कटिबद्ध होना पड़ेगा| कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक श्रीमती जिल कार-हैरिस ने उद्घाटन भाषण दिया| मंगलाचरण गीत एकता परिषद् के संस्थापक पी. वी. राजगोपाल ने प्रस्तुत किया तथा गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के अध्यक्ष न्या. सी. एस. धर्माधिकारी ने आशीर्वचन प्रस्तुत किया| अपने अध्यक्षीय भाषण में धर्माधिकारी ने कहा कि महिलाओं को बेहतर समाज की रचना के लिए पुरुषों को अपने साथ जोड़ना जरूरी होगा| हमारा प्रयास कब्रिस्तान के सन्नाटे के लिए नहीं बल्कि स्त्री-पुरुष दोनों के लिए बेहतर समाज की रचना के लिये होना चाहिए| कार्यक्रम में फाउण्डेशन के संचालक अशोक जैन तथा अन्य गणमान्य सज्जन उपस्थित थे| जमीनी स्तर से जुड़े महिला कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर अपने सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराया| इस उद्घाटन कार्यक्रम में भारत भर से पधारी पचास महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं को उनके असाधारण कार्य के लिए अन्तर्राष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों द्वारा सम्मानित किया गया|

डॉ. भवरलाल जैन को समर्पित: वैश्विक एकता का वृक्ष

देश-विदेश से पधारे प्रतिभागियों ने अहिंसा और शांति के लिए अपनी-अपनी जगह से मिट्टी लायी थी और इस मिट्टी को एकत्रित कर मानव समुदाय के लिए एकता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया| इसी मिट्टी को लेकर सम्मेलन के प्रारंभ में वैश्विक एकजुटता के लिए गॉंधी तीर्थ के संस्थापक स्व. भवरलाल जैन की स्मृति में गॉंधी तीर्थ परिसर में एक पीपल का वृक्ष लगाया गया| इस अवसर पर एकता यूरोप की प्रधान मारग्रेट होगेनटोवियर, वरिष्ठ गॉंधियन न्या. धर्माधिकारी, जैन इरिगेशन लिमिटेड के प्रमुख तथा गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के संचालक अशोक जैन, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता पी. वी. राजगोपाल, गुजरात विद्यापीठ के पूर्व कुलनायक सुदर्शन आयंगार, गौरी कुलकर्णी, प्रसून लतांत, आशा रमेश, गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के समन्वयक उदय महाजन तथा जॉन चैल्लदूरै आदि उपस्थित थे|

विषय आधारित सत्र का आयोजन

सम्मेलन हेतु चयनित विषयों पर विचार-विमर्श करने के लिए कार्यक्रम को कई सत्रों में विभाजित किया गया| प्रथम सत्र ‘उभरते वैश्विक संकट और समाधानकारी व्यवहार’ विषय पर चला| वर्तमान में हम सामाजिक-आर्थिक संकट की स्थिति से गुजर रहे हैं, यह एक गंभीर स्थिति है| इस स्थिति में वैश्विक न्याय, आर्थिक बदलाव और न्यायसंगतता के लिए सभी राष्ट्रों को अहिंसक और शांतिपूर्ण ढंग से आत्मनिर्भर होना होगा|

द्वितीय सत्र में ‘अहिंसा के माध्यम से सामुदायिक परिवर्तन में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर चर्चा हुई| पैनल में उपस्थित सदस्यों ने कहा कि कट्टरपंथी सोच लोगों को हिंसक बनाती है और प्रत्यक्ष और संरचनात्मक हिंसा महिलाओं में अधिक असुरक्षा महसूस करवाती है| गॉंधीजी निर्बल समुदायों की शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और आर्थिक स्थिरता चाहते थे| ऐसा करने से निर्बल समुदाय के नागरिकों को मुख्य धारा में जोड़ सकते हैं, उनके लिए जरूरत है एक ऐसी संस्कृति का जो अहिंसा और असहयोग के मूल्यों का निर्माण करें|

तीन दिन चले इस सम्मेलन में कुल दस सत्रों में महिलाओं की सुरक्षा, स्वतंत्रता और उसके सशक्तीकरण के साथ विभिन्न मुल्कों में लंैंगिक

और आर्थिक समानता, महिला शांति सेना, महिला और सामाजिक आंदोलन, तनावपूर्ण क्षेत्रों में शांति अध्ययन, महिला और स्थानीय अर्थव्यवस्था, महिला और अहिंसक आंदोलन पर विचार-विमर्श किया गया| साथ ही २०२० में वैश्विक स्तर पर जय जगत् अभियान, महिला नेतृत्व विकास पर अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने अपने अनुभवजन्य सुझावों से सम्मेलन को उपयोगी बनाया|

सम्मेलन के समापन के दिन जार्जिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा, भारत, नेपाल, केन्या, फिलीपीन्स, थाईलैंड, अजरबैजान, कंबोडिया, स्वीडन, अमेरिका, स्वीजरलैंड के साथ पुणे, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, झारखंड, केरल, बिहार और दिल्ली युवा महिला समाजकर्मियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में शांति, समानता, सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए महिलाओं द्वारा किए जा रहे आंदोलनों और अभियानों की चर्चा की और अपनी-अपनी कामयाबी की मिसालों को भी पेश किया|

इस अवसर पर दो नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था| गौरी कुलकर्णी द्वारा प्रस्तुत ‘मोहन से महात्मा’ तथा कस्तूरबा की जीवन कहानी को दर्शाता पूना के नाद-रूप नृत्य कला संस्था के द्वारा निर्मित नृत्य कार्यक्रम ‘पीड़ पराई जाने रे’ का भव्य आयोजन किया गया था|

अन्तर्राष्ट्रीय महिला सम्मेलन में जलगॉंव घोषणा-पत्र जारी

२ से ४ अक्तूबर २०१६ को जलगॉंव स्थित गॉंधी तीर्थ में संपन्न हुए अन्तर्राष्ट्रीय महिला सम्मेलन में सभी देशों की महिलाओं से वैश्विक शांति और सामाजिक न्याय के लिए एकजुट होने की अपील की गयी| सम्मेलन के आखिरी दिन ‘जलगॉंव घोषणा पत्र’ में कहा गया है कि हम महिला समाजकर्मी दुनियां भर में हर व्यक्ति के सम्मान को सुनिश्चित करने के साथ-साथ सभी स्त्री-पुरुषों को शांति से रहने के अधिकारों को जानने और उसे हासिल करने में सहयोग करेंगे|

हम स्वीकार करते हैं कि मानव जीवन में महिलाओं के सहयोग के बिना शांति स्थापित नहीं हो सकती| इसलिए उनके सशक्तीकरण के साथ हम पुरुषों को महिलाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करने के लिए आमंत्रित और प्रोत्साहित करते रहेंगे| इसके लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के बीच सहयोग, संगठन और संपर्क तंत्र का सामाजिक सेतुबंध बनायेंगे, जिससे अहिंसात्मक वैश्विक शांति और अहिंसक समाज का निर्माण हो सके|

जलगॉंव घोषणा पत्र में धरती के सम्मान और इसकी रक्षा के लिए शांतिमय और अहिंसक जीवन शैली को अपनाते हुए हर तरह के अन्याय, दमन और शोषण का विरोध जारी रखेंगे और आर्थिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और संस्थागत हिंसा का विरोध करने के लिए अनवरत अगुआई करते रहेंगे|

घोषणा पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि इस धरती पर सभी मुल्कों में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकार सभी के लिए है| इसलिए आज से हम स्वर्णिम, सुखद, शांतिमय और उर्वर भविष्य के लिए अपनी सक्रियता लगातार बढ़ाते रहेंगे|

यह घोषणा पत्र शांति अंतर्राष्ट्रीय महिला सम्मेलन में शामिल तीस से अधिक देशों की दो सौ से ज्यादा गॉंधी विचार में विश्‍वास रखने वाली महिला समाजकर्मियों, शांतिदूतों, विशेषज्ञों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने एकमत होकर पारित किया| यह घोषणा पत्र इंटरनेशनल गॉंधियन इनिसिएटिव फॉर नानवायलेंस एंड पीस की निदेशकश्रीमती जिल कार-हैरिस ने रखा| इंटरनेशनल गॉंधियन इनिसिएटिव फॉर नानवायलेंस एंड पीस, एकता फाउंडेशन ट्रस्ट तथा गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन की ओर से जलगॉंव के जैन हिल्स स्थित गॉंधी तीर्थ पर आयोजित इस तीन दिवसीय विराट अन्तर्राष्ट्रीय महिला सम्मेलन में महिला कार्यकर्ताओं ने वैश्विक और स्थानीय स्तर पर सामाजिक न्याय और शांति कायम करने के लिए प्रशिक्षण, संगठन रचना और संघर्ष की भावी रणनीति पर गहन चिंतन मनन किया|

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