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Articles -ग्रंथालय में नये ग्रंथों का आगमन

पुस्तकालय का महत्व तभी सार्थक होता है जब पाठक वर्ग पुस्तकालय तक पहुंचते है| व्यक्तित्व विकास से राष्ट्र विकास की अनुपम धरोहर के समान पुस्तकालय का योगदान अद्वितीय रहा है| इनके विकास व विस्तार के लिए सभी नागरिकों का कर्तव्य बनता है जिसके लिए सभी का सहयोग अपेक्षित है| इस विषय के संदर्भ में गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन शोधकर्ताओं, साहित्य प्रेमी, पाठक वर्ग को ग्रंथालय का अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए आमंत्रित करता है| पिछले तीन महीनों में फाउण्डेशन के पुस्तकालय में करीब २५ लोग स्थायी रुप से सदस्य बने और ५ मुलाकाती सदस्य पंजीकृत हुए है| इसी दिनों के दौरान विदेशी पाठकों ने भी अपना अमूल्य समय फाउण्डेशन के पुस्तकालय में बिताया| उनमें अमेरिका के डॉ. मार्क लिण्डले, इजराइल के शिमोन लेव भी शामिल है|

साथ ही गॉंधीजी के जीवन व विचारों से संबंधित कुछ नई किताबों का आगमन भी हुआ है| संत यशवंत केशव द्वारा अनुवादित - लोकमान्य तिलक एमनी याददाश्त अने ख्याति (गुजराती), गिरिराज किशोर कृत बा-गहन शोध के बाद कस्तूरबा गॉंधी के जीवन पर लिखा गया प्रामाणिक उपन्यास एवं उनकी ही किताब जुगलबन्दी, Perspectives on Nai Talim by Prabhath S.V., Contemplating Gandhi: Essays on Mahatmas life and thought, Chandrashekhar Dharmadhikari; Translated from Hindi by Ramchandra Pradhan, Give Nonviolence a Chance: The Journey of Neelkanta Radhakrishnan, Swarup ­noop एवं कहाणी चंपारण सत्याग्रहाची म. गॉंधीनी केलेल्या पहिल्या नीळीच्या सत्याग्रहाचं चित्रण (मराठी), दिवाण जयंत, जैसी सुंदर किताबें पुस्तकालय में उपलब्ध हुई है| कुछ पुरानी किताबों का संरक्षण प्रक्रिया के अंतर्गत सुरक्षित किया गया उनमें बहुमूल्य ७६ किताबों का संरक्षण विधि में समाविष्ट कर अभिलेखागार में संरक्षित की गई|

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