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Articles -कुष्ठ रोग निवारण पर संवाद

राष्ट्रपिता महात्मा गॉंधी कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति विशेष प्रेम और सहानुभूति रखते थे| वे इस रोग के सामाजिक आयामों को समझते थे और इसलिए उन्होंने कुष्ठ रोगियों को सामाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए सतत कार्य किया| गॉंधीजी से प्रेरणा लेकर मनोहर दीवान, बाबा आमटे जैसे व्यक्तियों ने अपना जीवन समर्पित किया| कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के सामाजिक बहिष्कार को समाप्त करने के लिए इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने का सफल प्रयास करते हुये इन महानुभावों ने एक लंबा रास्ता पार किया|

वर्तमान समय में भी कुष्ठ रोग के प्रति समाज में भ्रमित मान्यता फैली हुई है, इसके प्रति सामाजिक शिक्षा का प्रयास होना चाहिए| इसी उद्देश्य को दृष्टिगत रखते हुये गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा २७ अगस्त २०१६ के दिन कुष्ठ रोग विषय पर एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया| इस संवाद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जलगॉंव के कुष्ठ रोग निवारण सेल के रविशंकर भराड ने बहुमूल्य जानकारी प्रदान की| उन्होंने बताया कि जितना व्यक्तिगत स्वास्थ्य महत्त्वपूर्ण है उतना ही सामाजिक स्वास्थ्य भी आवश्यक है| कुष्ठ रोगियों के प्रति समाज में फैले इस सामाजिक कलंक को दूर करना अत्यन्त आवश्यक है| कुष्ठ रोग से व्यक्ति ज्यादा परेशान नहीं होता लेकिन समाज का उसको देखने का नज़रिया गलत है| वह उनके लिए असामाजिक है, यह बात कुष्ठ रोगी के लिये कुष्ठ रोग से ज्यादा घातक बन जाती है| किसी भी अच्छे समाज की निशानी उस समूह में रहने वाले कमजोर और निःशक्त लोगों को समानता का मौका देना और उन्हें उसके लिए तमाम अवसर उपलब्ध करवाना है|

इस कार्यक्रम के माध्यम से कुष्ठ रोग के बारे में नई जानकारी के साथ सवाल-जवाब के द्वारा भ्रमित मान्यताओं पर भी प्रकाश डाला गया| साथ ही कुष्ठ रोगी के प्रति सामाजिक संवेदना फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया गया| कार्यक्रम में जैन इरिगेशन के डॉ. ठाकरे एवं अनिल नाईक के साथ फाउण्डेशन के कार्यकर्ता, एवं समाज कार्य स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम के छात्र उपस्थित थे|

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