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Articles -हिरोशिमा स्मृति दिन पर विशेष कार्यक्रम

६ अगस्त, २०१६ हिरोशिमा दिवस की स्मृति में गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन एवं डॉ. अन्ना साहब जी. डी. बेंडाले महिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्त्वावधान में ‘वैश्विक परिवर्तन की ओर’ विषय पर एक कार्यक्रम संपन्न हुआ| उक्त कार्यक्रम में नागपुर के शांति व मानव अधिकार पर कार्य करने वाले डॉ. युगल रायलू मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे|

डॉ. रायलू ने अपने व्याख्यान में कहा कि युद्ध कोई भी समस्या का समाधान नहीं है बल्कि वह समस्या का निर्माण करता है| पॉंच हजार साल पहले महाभारत का युद्ध हुआ था और आज के समय में कारगिल का युद्ध भी हुआ, इस दोनों युद्ध की आवश्यकता नहीं थी| बल्कि इस दोनों घटनाओं में शांति के माध्यम से समस्या का हल संभव था| युद्ध की स्थिति किसी के लिए भी अच्छी नहीं है क्योंकि युद्ध में हारनेवाला भी रोता है और जीतने वाला भी रोता है| शांति के मार्ग पर चलकर हम किसी भी बड़ी समस्या का समाधान कर सकते हैं|

हिरोशिमा घटना पर प्रकाश डालते हुए फाउण्डेशन के डॉ. जॉन चेल्लदुरै ने कहा कि ६ अगस्त १९४५ के दिन विश्व को अपनी शक्ति का प्रदर्शन कराने के लिए अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में जापान के हिरोशिमा एवं नागासाकी शहर पर परमाणु बॉम्ब डाले थे| अमेरिका के इस अमानवीय कृत्य ने मानव समूहों की लाशें बिछा दी थी, पूरे विश्व ने इस घटना की निंदा की थी| हिरोशिमा घटना के ७० साल के बाद भी उस बर्बरता भरे कृत्य का असर आज भी दिखायी देती है| महात्मा गॉंधी हमेशा कहते थे कि शांति केवल अहिंसा के जरिए ही प्राप्त कर सकते हैं| हमारे हर एक कार्य में केन्द्र स्थान पर अहिंसा का तत्त्व होना चाहिए|

कार्यक्रम के अंत में अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. अन्ना साहब जी. डी. बेंडाले महिला महाविद्यालय के सहायक प्राचार्य डॉ. रामप्रकाश गुप्ता ने महात्मा गॉंधी के जीवन से जुड़े मूल्यों के बारे में छात्रों को जानकारी प्रदान की|

प्रदर्शनी

इस स्मृति दिन पर हिरोशिमा एवं नागासाकी शहर की दिल दहला देनेवाली तस्वीरों का प्रदर्शन भी आयोजित किया गया था|

गॉंधी तीर्थ पर हिरोशिमा स्मृति दिन पर चर्चासत्र

६ अगस्त, २०१६ को हिरोशिमा स्मृति दिवस के अन्तर्गत गॉंधी तीर्थ पर डॉ. युगल रायलू का व्याख्यान आयोजित किया गया| महात्मा गॉंधी के शांति व अहिंसा के विचारों को प्रस्तुत करते हुए डॉ. युगल रायलू ने कहा कि शांति के लिए हिंसा का मार्ग बिलकुल जायज नहीं है, उसके लिए आवश्यक है व्यक्ति अपने भीतर से शांति की अनुभूति करेें, शांति बाहर की किसी चीज़ से नहीं मिलती| वह अपने अन्दर की चीज़ है| डॉ. रायलू ने कहा कि हिरोशिमा पर अमेरिका ने अणु बॉम्ब डालकर मानव जीवनशैली पर एक विकराल संकट का निर्माण किया था| आज भी कई देश अपनी शक्ति प्रदर्शन के लिए अणु बॉम्ब तैयार करते हैं, किन्तु यह दुःख की बात है कि वे विकास के कार्य में, या शिक्षा से जुड़े कार्य में इतना खर्च नहीं करते जितना संरक्षण में करते हैं| इसलिए सही मायने में शांति तभी मिल सकती है जब हम अपनी वृत्तियों पर नियंत्रण करें|

फाउण्डेशन के ग्रंथालय में हिरोशिमा घटना पर आयोजित इस प्रदर्शनी एवं व्याख्यान कार्यक्रम में फाउण्डेशन के कार्यकर्ता एवं जैन इरिगेशन के अधिकारीगण उपस्थित थे| इस कार्यक्रम कि फलश्रृति यह रही की सभी उपस्थित श्रोता वर्ग को यह महसूस हुआ की ऐसी घटना दुबारा नहीं घटनी चाहिए| इस विश्व को युद्ध की नहीं किन्तु गॉंधी विचार की आवश्यकता है| कार्यकर्ताओं ने डॉ. रायलू से हिरोशिमा की घटना के संदर्भ में कई सवाल किये गये ताकि वे भली प्रकार से इस घटना को समझ सकें|

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