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Articles -तिलक की नज़र में गॉंधी

‘गॉंधी जिस तरह से विलायत से बारिस्टर की परीक्षा पास करके आये, ऐसे बहुत सारे लोग हैं| उनके पिताजी दीवान थे, वैसे ही बहुत सारे लोगों के पिताजी भी दीवान होंगे| उनका स्वभाव जैसा सादा और सरल है वैसे बहुत लोगों के होंगे| उसमें कुछ विशेष नहीं| इस देश में जब से अंग्रेजी शिक्षा का प्रचार हुआ तब से बहुत सारे लोग हिन्दुस्तान से विश्वविद्यालयों के माध्यम से बाहर गये हैं| विश्व के इतिहास या फिर ज्योग्राफी की अच्छी तरह जानकारी होना, तथा किसी एक शास्त्रीय विषय पर बिना किसी गलती के विचार व्यक्त करने जैसे कार्य केवल बुद्धि के उपयोग से होते हैं| इसलिए यह कार्य हममें से ज्यादा बुद्धिमान लोगों ने पिछले १५० सालो में बहुत अच्छी तरह से करके दिखाया है| उसी तरह पाश्चात्य सामाजिक पद्धति, पाश्चात्य समझौता, या फिर समाज रचना इत्यादि विषय के सन्दर्भ में बौद्धिक एवं तार्किक विचार करने में सुशिक्षित या बुद्धिजीवी वर्ग ने अपनी बुद्धि को अच्छी प्रकार से उपयोग किया है| परंतु शील या चरित्र जिसकी इस कर्ममय भूमि और आसपास के मंडल पर सत्ता चलती है, और जिससे अलग-अलग कार्य की सिद्धि प्राप्त होने की संभावना उत्पन्न होती है, वैसे शील व चरित्र के अभिधारक उदाहरण वाले व्यक्ति प्रत्यक्षत: हमें कम नजर में आते हैं और जो नजर आते हैं उनमें से एक हैं श्रीमान गॉंधी|’७

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