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Articles -गोखले की नज़र में गॉंधी

उनके राजकीय गुरु एवं भारतसेवक गोपालकृष्ण गोखले ने सन् १९०९ में गॉंधीजी के प्रति अपने अहोभावयुक्त उद्गार कहे थेः ‘‘श्रीमान गॉंधी को मैं नजदीक से पहचानता हूं, इस घटना को मैं अपने जीवन की अमूल्य घटना मानता हूं| और मैं आपको कह सकता हूं की पृथ्वी पर उनसे अधिक पवित्र, अधिक उदात्त, अधिक बहादुर और अधिक महान आत्मा ने इस धरती पर पहले कभी कदम नहीं रखा| श्रीमान् गॉंधी ऐसे पुरुषों में से एक हैं, जो स्वयं तपस्वी का जीवन बिताते हैं| वह सत्य, न्याय और मानवबंधुओं के प्रति प्रेमभावना के साथ सर्वोच्च सिद्धांत को समर्पित हैं| उनके अपने दुर्बल मानवबंधुओं की आँखों पर हाथ रखते ही जैसे चमत्कार होता है और मानो उनको नई दृष्टि प्रदान की हो| वे ऐसे पुरुष हैं, जिसे मानवों में महामानव, वीरों में महावीर तथा देशभक्तों में महादेशभक्त कह कर संबोधन कर सकते हैं| और हम यह यथार्थ रूप से कह सकते हैं कि आज के समय में भारतीय मानवता उनमें परमावधि पर प्रतिपादित होती हुई दिखाई देती है| गॉंधीजी में वह अद्भुत आत्मिक शक्ति है, जो उनके आस-पास के साधारण लोगों को भी वीरत्व और शहादत के लिए प्रेरित करती है|’’६

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