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Articles -गॉंधीजी व महाराष्ट्र की राजकीय स्थितिः

गॉंधीजी व महाराष्ट्र का संबंध बहुत पुराना है| फिरोजशाह मेहता, लोकमान्य तिलक, गोखले आदि महाराष्ट्र के नेताओं से २०वीं शताब्दी के पूर्व ही गॉंधीजी मिल चुके थे| गोखले को राजकीय गुरु के रूप में अपने हृदय सिंहासन पर बिठाये, उनकी गुरु-निष्ठा ऐसे ही बढ़ती चली गयी| उनका काव्यात्मक वर्णन करते हुए गॉंधीजी कहते हैं कि ‘मुझे लोकमान्य समुद्र जैसे, गोखले गंगा जैसे, फिरोजशाह महेता हिमालय जैसे लगे| गंगा में तो में स्नान कर सकता हूं, समुद्र में डूबने का डर है, हिमालय पर चढ़ना कठिन है|’

सन् १९१५ में गॉंधीजी ने अपने आगमन के साथ ही ऐसे राजकीय नेता जो जनता से अलग व गुरुताग्रंथि से युक्त उच्च स्थान पर थे, उनको वहॉं से उठाकर लोगों के सामने लाये, इतना ही नहीं बल्कि लोगों के साथ उनका आत्मीय भाव जोड़ दिया| नतीजा यह हुआ की जनहृदय में राजकीय पुरुषों का स्थान निर्माण हुआ|

गॉंधीजी का व्यक्तित्व किसी भी पहलू से देखेंगे तो सभी नजरिये से उनके जीवन की सुंदरता की झॉंकी दिखायी देती है| राजनीति में पहली बार उन्होंने सत्य व अहिंसा के तत्त्वों को समाविष्ट किया| इसलिए मान्चेस्टर गार्डियन ने लिखा था कि ‘इस दुर्बल बूढ़े के साहस और अध्यात्म बल के लिए भारत यदि आभारी हो, तो वह सकारण ही है| वह संतों में राजनीतिज्ञ हो सकता है, परन्तु राजनीतिज्ञों में वह उतना ही संत भी है|’५

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