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Articles - प्रासंगिक पठन

अतीत एवं घटनाओं को न्याय देने के लिए इतिहास प्रासंगिक रूप से पढ़ा जाना चाहिए तभी उनको न्याय दे सकते हैं| जैन धर्म के अनुसार कोई भी घटना एवं व्यक्ति को चार तत्त्वों के आधार पर देखना चाहिए|

१. द्रव्य, २. क्षेत्र, ३. काल और ४. भाव| संदर्भ के बाहर का सवाल हमेशा भ्रामक मान्यताएं निर्माण करता है| उदाहरण के लिए ‘१९वीं शताब्दी में लोग क्यों बैलगाड़ी से मुसाफरी करते थे जबकि वायुयान से क्यों नहीं? मौलिक विश्लेषण इस सवाल को अप्रासंगिक ठहराकर अयोग्य घोषित करेंगे| अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिला देने वाले मोहनदास करमचंद गॉंधी ने अपने आचरण के द्वारा विश्व-बंधु का नया पाठ सिखाया| शांति व संघर्ष निवारण के नये आयाम को विकसित किया| शायद ही कोई व्यक्ति होंगे जिनके शत्रु नहीं होंगे| उनमें गॉंधीजी थे, ‘सत्याग्रह’ में अपने विरोधी के प्रति हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है| धैर्य एवं सहानुभूति से विरोधी को उसकी गलती से मुक्त करना चाहिए| इसलिए इस सिद्धांत का अर्थ है विरोधी को कष्ट अथवा पीड़ा देकर नहीं, बल्कि स्वयं कष्ट उठाकर सत्य का रक्षण| यानी की बुराई के बदले भलाई का सिद्धांत| इस आधार पर यह कह सकते है कि वे विरोधियों के साथ भी ऐसा व्यवहार करते थे मानो वे उनके मित्र हो, इसका मतलब यह नहीं है कि वे उनके एजन्ट थे!

उपरोक्त पैस किये गये संदर्भों से यह निश्चित रुप से पता चलता है कि गॉंधीजी अंग्रेजी सल्तनत के एजन्ट नहीं थे| हमे यह ख्याल रखना चाहिये कि आधा-अधूरा संदर्भ किसी भी घटना या व्यक्ति को समझने के लिये पर्याप्त नहीं है| जो लोग संदर्भ के बारे में विचार नहीं करते वे लोग बहस के आधार पर निश्चित जवाब तक भी नहीं पहुँच सकते|

गॉंधीजी के जीवन व कार्यों को इन्हीं जैन धर्म के तत्त्वों के आधार पर समझना चाहिए| अगर हम ऐसा करते हैं तो अक्षरशः महान सातत्य के साथ उभरती आत्मा के जीवन कथन को सार्थक रूप में समझ पायेंगे|

सन्दर्भ -

१) मो.क.गॉंधी, सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा (२०१२), १५५-१५६;

२) इंडियन ओपिनियन, ३०-७-१९०३; ३) मो.क.गॉंधी, सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा (२०१२), ४०७-४०८; ४) यंग इंडिया, २३-३-१९२१; ५) यंग इंडिया, १५-१२-१९२१; ६) भाषणः मद्रास के कानून-पेशो लोगों द्वारा दिये गये भोज में, २४-४-१९१५; ७) यंग इंडिया, ९-२-१९२१; ८) नवजीवन, २९-१२-१९२०; ९) वही; १०) महात्मा गॉंधी, बी. आर. नन्दा, १९६५, पृ. १४४-१४५; ११) हरिजन, २९-४-१९३३.

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