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Articles - गॉंधी तीर्थ पर मनाया अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस

सदियों से लेकर वर्तमान तक इतिहास, कला एवं संस्कृति के विभिन्न अवशेषों को संग्रहालयों के माध्यम से संग्रहीत एवं संरक्षित किया जा रहा है| संग्रहालय देश की सांस्कृतिक विरासत को संकलित, संरक्षित एवं संवर्धन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं| अंतर्राष्ट्रीय वस्तुसंग्रहालय संगठन हम सभी को अपने पास पड़ोस में बिखरी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में अपना अमूल्य योगदान देने के लिये सचेत करने का पूरा प्रयास कर रहा है| विश्व के १४५ देशों के ३५००० संग्रहालयों में यह दिवस मनाया जाता है| हर साल इसके लिये एक नया विषय दिया जाता है| वर्ष २०१६ के लिए ‘सांस्कृतिक एकता में संग्रहालय की भूमिका’ यह विषय दिया गया है|

हमारे पाठक वर्ग को पता है कि गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन ने गॉंधीजी के जीवन एवं कार्यों को दर्शाने वाला एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ‘खोज गॉंधीजी की’ नामक संग्रहालय का निर्माण वर्ष २०१२ में किया है| फाउण्डेशन द्वारा १८ मई २०१६ का अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस हॉबी क्लब, जलगॉंव के साथ मिलकर मनाया गया| इस प्रसंग पर सभी नागरिकों के लिये एक ऐतिहासिक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था जिसमें जैन इरिगेशन के सहयोगी दामोदर इंगले ने इंडिया बुक, लिम्का बुक, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में दर्ज ८५००० विविध बटन्स के संग्रह को दर्शाया था| मजीदभाई झकेरिया ने मौर्य, गुप्त, सातवाहन काल के चॉंदी के सिक्के, बाबर से आलमगीर तक के सभी मुग़ल सत्ता के सिक्के, छत्रपति शिवाजी महाराज तथा मराठा काल के सिक्के, ब्रिटिश तथा विविध संस्थान के सिक्के, ११९ देशों के नोट, फेन्सी और गलत छपी हुई नोट, भारत की आजादी के समय के ६०५ संस्थानों के राजा-महाराजा तथा इनके छायाचित्र, गॉंधीजी का चित्र अंकित चांदी के नोट जैसे अन्य ऐतिहासिक वस्तुओं को प्रदर्शित किया था| डॉ. प्रकाश महाजन ने विविध देशों की पत्र मैत्री से संकलित किए हुए १२ देशों के २००० डाक टिकट एवं साबीर शेख ने भिन्न देशों के अलग-अलग रंग के पुराने १ इंच के पेन, एरीअल पेन, मार्बल पेन, अलग-अलग कंपनी के १४००० पेन का संग्रह, देश विदेश के विभिन्न १६००० माचिस बॉक्स का संग्रह, आदि प्रदर्शित किया था| इसका अवलोकन गॉंधी तीर्थ के अध्यक्ष अशोक जैन, महाराष्ट्र राज्य पुराभिलेखागार के संचालक डॉ. दिलीप बलसेकर, जिला अधिकारी

डॉ. रुबल अग्रवाल, दलुभाऊ जैन, इकरा एज्युकेशऩ सोसायटी के करीमभाई सालार, राष्ट्रीय कला पुरस्कार प्राप्त रमाकांत सूर्यवंशी तथा बड़ी मात्रा में उपस्थित छात्रसमूह एवं नागरिकों ने किया|

संग्रहालय के सिक्के भी सांस्कृतिक एकात्मता का प्रतीक होते हैं इस विषय पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. बलसेकर ने सभी को मार्गदर्शन दिया| इस अवसर पर गॉंधी तीर्थ के सहयोगी भुजंगराव बोबडे द्वारा निर्मित भारत के सभी संग्रहालयों की तथा उसके निर्माण के लिए आवश्यक फडिंग रिसोर्सेस की जानकारी देनेवाली www.museumsheritage.com इस वेबसाईट का भी उद्घाटन किया गया|

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