Gandhi Research Foundation

Articles - मोहन से महात्मा प्रदर्शनी तथा व्याख्यानमालायें

वृक्षारोपण कार्यक्रम संपन्न

२६ जनवरी, २०१६ को फाउण्डेशन एवं धानोरा ग्राम के युवा मंडल द्वारा गॉंव में स्थित श्मशान गृह को हराभरा करने के लिए उसके आसपास ६० पेड़ लगाये गये| इस कार्य को सफल बनाने के लिए युवा वर्ग ने श्रमदान के माध्यम से वृक्ष लगाने की जगह को साफ कर गड्ढे खोदेे| पेड़ लगाने तक ही सीमित न रहते हुए, पेड़ों को गोद भी लिया गया| ट्री गार्ड लगाकर प्रतिदिन उसमेंे पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी धानोरा गॉंव के युवा वर्ग ने उठाई| आज हर युवा अपने हाथों से हर रोज वृक्ष को पानी डालता है, तथा उसकी अच्छी तरह से देखभाल करता है, इस संकल्प के साथ कि आनेवाले सालों में धानोरा गॉंव को हराभरा करना है|

युवा वर्ग की इस प्रवृत्ति को देखकर ग्रामजनों को प्रेरणा मिलती है| इस कार्य हेतु युवकों को तैयार करने में फाउण्डेशन के कार्यकर्ता राजेन्द्र जाधव ने अपने नेतृत्व से युवावर्ग के बीच एक अलग छवि का निर्माण किया|

बापू को ‘भाव सुमनांजलि’

महात्मा गॉंधी के आश्रम में संगीत का स्थान हमेशा विशेष रहा है| इसलिए ऐतिहासिक दांडी मार्च के दौरान विख्यात संगीत वादक मोरेश्वर खरे ने दांडी की लंबी यात्रा को भजन संगीत के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया था|

फाउण्डेशन द्वारा महात्मा गॉंधीजी के ६८ वें स्मृति दिन के उपलक्ष्य में २९ जनवरी २०१६ की पूर्वसंध्या को जलगॉंव शहर में स्थित कान्ताई सभागृह में ‘भाव सुमनांजलि’ कार्यक्रम संपन्न हुआ| कार्यक्रम के विशेष अतिथि के तौर पर ज्येष्ठ गॉंधीवादी, समाजसेविका लताताई पाटणकर एवं फाउण्डेशन के सहायक डीन डॉ. जोन चैल्लदुरई उपस्थित रहे| कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई| कार्यक्रम के प्रमुख कलाकारों में नादब्रह्म के उपासक प्रा. संजय पत्कि, प्रा. मयुर पाटील, भागवत पाटील, अंजली धुमाल, गोपाल ठाकरे आदि कलाकारों के द्वारा सुमधुर भजन प्रस्तुत किए गये| कार्यक्रम की शुरुआत सर्व-धर्म प्रार्थना तथा ‘वैष्णव जन’ जैसे गॉंधीजी के प्रिय भजन से की गई, साथ ही ‘पायोजी मैंने राम रतन धन पायो’, ‘मत कर तू अभिमान रे बंदे’, ‘ठुमकत ठुमकत बाजे पैंजण’ इस तरह के भजन भी प्रस्तुत किए| उक्त कार्यक्रम में जलगॉंव के शहरीजनों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही|

गायक कलाकारों के लियेे संगीत उपकरणों द्वारा सुर-ताल की संगत देने के लिए अप्पा नेवे (सिंथेसायझर), पंकज भावसार (तबला), निलेश जोशी (करताल), रायसिंगजी (गिटार) उपस्थित थे| राष्ट्रगान से कार्यक्रम की समाप्ति हुई| सूत्र-संचालन का कार्य फाउण्डेशन के भुजंगराव बोबडे एवं चंद्रशेखर पाटील ने किया|

जल साक्षरता पदयात्रा से रचनात्मक कार्य साकार

दिनांक ३० जनवरी २०१६ को गॉंधीतीर्थ से जल साक्षरता पदयात्रा का शुभारंभ किया गया| जिसमें संस्था के लगभग २० कार्यकर्ताओं का काफ़िला शिरसोली मार्ग से होते हुए जलके, बिलवाड़ी, वावडदा, खर्ची, रवंजा, दापोरी, खेड़ी और बैजनाथ इन प्रमुख गॉंवों से होकर गुजरा| सभी जगह गॉंव के सरपंच सहित ग्रामीण लोगों ने पदयात्रियों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया| इस दौरान विभिन्न प्रकार के सामाजिक जनजागृति के कार्यक्रम सम्पन्न हुए और यह सम्पूर्ण पदयात्रा लोगों के सहयोग से सफल रही|

विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों के माध्यम से लोगों को पानी का महत्त्व व उनके प्रति हमारी सामाजिक जिम्मेदारी को समझ कर उसपर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया| सभी गॉंवों में लोगों ने ही भोजन और आवास का प्रबंध किया था| गॉंवों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उनके समाधान की चर्चा कर, उसे सुलझाने के लिए लोक भागीदारी आधारित निर्माण करने की दिशा में भी पहल की गयी|

श्रमदान

पदयात्री अपनी दिनचर्या सुबह सामूहिक प्रार्थना के साथ शुरू करते थे| उसके बाद सभी पदयात्री गॉंव में प्रभात फेरी के लिए निकलते थे| इस दौरान रास्ते में गॉंधी प्रेरक गीत गाते हुए लोगों को मेहनत की महिमा समझाते थे| इस प्रेरक गीत के माध्यम से लोगों को हम अपने साथ सामुदायिक श्रमकार्य के लिए जोड़ने में सफल रहे| पदयात्रियों के साथ मिलकर ग्रामवासी सुबह ७ बजे से ९ बजे तक गॉंव की साफ-सफाई करते थे|

सामुदायिक संवाद कार्यक्रम

सुबह १० बजे से फाउण्डेशन के कार्यकर्ता के विभिन्न दलों में मोहल्ला सभा के लिए निकल पड़ते थे| इस मोहल्ला सभा में मुख्यतः जल समस्या, गॉंव की स्थिति और कृषि संबंधित विषयों पर चर्चा की जाती थी| एक दल गॉंव के कृषि क्षेत्र में जाता था| जैन इरिगेशन सिस्टम्स् लि. के विनोद रापतवार, डॉ. संतोष देशमुख और फाउण्डेशन के कार्यकर्ता ग्रामजनों के साथ जल विस्तार का मुआयना करते थे जिसके आधार पर गॉंव में उपलब्ध जल स्रोत को समझकर जल समस्या और उसके समाधान पर चर्चा की जाती थी|

महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम

दोपहर ३ बजे से रंगोली प्रतियोगिता होती थी| जिसमें गॉंव के युवतियों और महिलाएँ रंगोली के माध्यम से अपनी कला व संस्कृति का सुंदर प्रदर्शन करती थीं| सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल पर ही सुबह से शाम तक अम्बर चरखे की प्रदर्शनी रखी जाती थी जहॉं ग्रामीण महिला और युवक चरखे को चलाकर सूत निकालने का प्रयास करते थे| साथ ही साथ अम्बर चरखा आजीविका का साधन कैसे बने, इस विषय पर फाउण्डेशन के कार्यकर्ता महिला स्वयं सहायता समूह को समझाते थे|

दंत चिकित्सा कार्यक्रम

दोपहर ३ बजे से ६ बजे तक मंदिर या विद्यालय प्रांगण में दंत चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जाता था| यह कार्यक्रम जलगांव के इन्डियन डेन्टल एसोसिएशन के विशेषज्ञों द्वारा आयोजित किया गया| जिसमें विभिन्न गॉंव के लगभग ६०० बच्चों ने भाग लिया और उन्हें टूथपेस्ट, ब्रश के साथ-साथ चॉकलेट ड्रिंक भी उपलब्ध कराया गया| दंत चिकित्सा शिविर में बच्चों को अपने दॉंत को कैसे स्वच्छ एवं स्वस्थ रखा जाए उसके उपाय बताये गये|

लोकजागृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम

सभी गॉंवों में शाम को ६ बजे से तकरीबन ९ बजे तक सामूहिक प्रार्थना के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए| इसमें फाउण्डेशन के प्रमोद चिकेरुर ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से ग्रामवासियों को अवगत कराया| पदयात्रियों द्वारा सामाजिक जागृति के लिए लघु फिल्म एवं पथनाट्य प्रस्तुत किए गये| पथनाट्य के माध्यम से जल, शौचालय, बेरोजगारी, व्यसन एवं कृषि इत्यादि प्रमुख समस्याओं और उनके समाधान पर संदेश दिया गया| इस दौरान रंगोली कला के विजेता को पारितोषिक देकर सम्मानित भी किया गया| अंत में सभी पदयात्रियों के तरफ से गॉंवों में किए गए सहयोग के लिए धन्यवाद के साथ कार्यक्रम की समाप्ति होती थी और अगले सुबह पदयात्रा विदाई के लिए ग्रामजनों को आमंत्रित किया जाता था| इसी प्रकार एक गॉंव में दो दिन बिताकर यह काफिला अगले पड़ाव के लिए निकल जाता था|

दिनांक ९ फरवरी को पदयात्रा की समाप्ति बैजनाथ गॉंव में हुई| यहॉं पदयात्रा का अन्त नहीं अपितु अगले पदयात्रा और पदयात्रा के दौरान गॉंव में किए गए समस्या की पहचान और समाधान के लिए कार्य की शुरुआत हुई जिससे फाउण्डेशन द्वारा गोद लिए गॉंव में कार्य करने वाले कार्यकर्ता ग्राम स्वराज्य कार्यक्रम के अंतर्गत इसे पूरा कर सकें|

पदयात्रा के दौरान सुधीर पाटील, चन्द्रशेखर पाटील, विश्‍वजीत पाटील, सुरेश पाटील, बिरेन्द्र कुमार सोनी, डॉ. जॉन चैल्लादुरई, अजय क्षीरसागर, नरेन्द्र चौधरी, अशोक सोनार, बालु साबले, श्रीराम खलसे, राहुल लांबोले, सागर चौधरी, राजेन्द्र जाधव एवं पीजी डिप्लोमा के छात्रों का विशेष योगदान रहा|

गॉंधी निर्वाण दिन नहीं निर्माण दिन

फाउण्डेशन की गतिविधियों में गॉंधी निर्वाण दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन मुख्य रहा है जिसका उद्देश्य एक नये निर्धार के साथ गॉंधी विचारों को समुदाय में प्रस्थापित कर रचनात्मक कार्यों को साकार करना है| इस वर्ष गॉंधी निर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम गॉंधी तीर्थ पर संपन्न हुआ| सर्वधर्म प्रार्थना, आश्रम भजनावली से भजन, एवं सूत कताई के साथ बापू को सूती माला अर्पण कर इस कार्यक्रम का प्रारम्भ हुआ| फाउण्डेशन ने एक प्रकार से गॉंधी निर्वाण दिन को गॉंधी निर्माण दिन में परिवर्तित कर दिया है जिसमें शामिल है- निर्माण मानव मूल्यों का, निर्माण विधायक कार्यक्रम का, निर्माण अहिंसक समाज का, निर्माण समानता का तथा निर्माण सर्वोदय समाज का| फाउण्डेशन का मानना है कि इन्हीं संकल्पनाओं को सार्थक स्वरूप देकर बापू को सही मायने में श्रद्धांजलि अर्पित की जा सकती है|

उक्त कार्यक्रम में साहित्यिक जगत के श्रीमान मंगलेश डबराल तथा सेवादास श्री दलूभाऊ जैन उपस्थित रहे| श्रीमान डबराल ने अपनी अभिव्यक्ति में वर्तमान परिस्थिति में गॉंधीजी के विचार व कार्य की आवश्यकता को महसूस कर, फाउण्डेशन के प्रयास की सराहना की| समाजसेवी दलूभाऊ जैन ने अपने मुख्य वक्तव्य में गॉंधीजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महात्मा गॉंधी ने मानव समुदाय को नये आयाम प्रदान किये|

इस कार्यक्रम में गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के कार्यकर्ता, जैन इरिगेशन के कर्मचारी एवं अतिथि विशेष के साथ करीब २०० लोग उपस्थित थे| कार्यक्रम का सूत्र-संचालन फाउण्डेशन के कार्यकर्ता अश्विन झाला ने किया|

‘जल तपस्वी भवरलालजी जैन जल संधारण योजना’

गावों एवं कृषि क्षेत्रो में से बहने वाले नैसर्गिक जल स्रोतों का व्यवस्थापन कर अधिक से अधिक पानी को जमीन में उतारकर पानी के स्तर को बढ़ाना अति आवश्यक है ताकि आने वाले समय में पीने एवं सिंचाई के लिए पानी की निर्बाध आपूर्ति की जा सके| इस लक्ष्य की पूर्ति हेतु गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन एवं भवरलाल ऍण्ड कांताबाई जैन मल्टिपर्पज फाउण्डेशन के सहयोग से जलग्रहण क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए फाउण्डेशन द्वारा ‘जल तपस्वी भवरलालजी जैन जल संधारण योजना’ का निर्माण किया गया| इस योजना के अंतर्गत लोक भागीदारी के साथ आधुनिक यंत्र के माध्यम से जलगॉंव तहसील के कतिपय गॉंवों में जल स्रोत गहरा करने का कार्य संपन्न हुआ|

दि. १ फरवरी के दिन जलके गॉंव में पोकलैन यंत्र के माध्यम से जल स्रोत गहरा करने की शुरुआत की गई थी| ४० दिन तक चले इस कार्य में जलके गॉंव में स्थित नायगाव उपनदी पर पोकलैन के माध्यम से ५६० मीटर लंबाई, २८ मीटर चौड़ाई तथा करीब ३.५ मीटर गहरा किया गया| और बोढ़रे उपनदी की खुदाई कर उसे ११८० मीटर लंबाई, १८ मीटर चौड़ाई तथा करीब ३.५ मीटर गहराई के साथ दोनो उपनदीयों की जलसंचय क्षमता ४.५ करोड़ लीटर की गई| इस कार्य में पोकलैन यंत्र की सहायता फाउण्डेशन द्वारा उपलब्ध कराई गई|

वावड़दा गॉंव में कै. इंदिरा माधव वसतीगृह संस्था के पास से बहनेवाले छोटे झरने पर १०० मीटर की लंबाई पर करीब ३ मीटर खुदाई कर १५ लाख लीटर क्षमतावाला जलग्रहण क्षेत्र का निर्माण किया गया|

वसंतवाडी - इसी कार्य पद्धति के आधार पर वसंतवाडी गॉंव के पास से बहने वाला कोसल्या उपनदी पर पोकलैन के माध्यम से ५२२ मीटर लंबाई, १८ मीटर चौड़ाई तथा ३ मीटर तक गहराई के साथ उपनदी की जलसंचय क्षमता ४० लाख लिटर निर्माण हुई| यह कार्य वसंतवाडी ग्रामजनों एवं फाउण्डेशन की मदद से पूर्ण हुआ|

उपरोक्त कार्य से आनेवाली बारिश के मौसम में तैयार किए गये जलग्रहण क्षेत्रों में जमीनी पानी का स्तर निश्चित ही बढ़ेगा| इससे आस-पास के गॉंवों को भी पीने एवं सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी मिलेगा|

डॉ. गेब्रियल बाल का योगदान

उच्च गुणवत्ता के शोध के लिए समृद्ध पुस्तकालय आवश्यक है| फाउण्डेशन के पुस्तकालय में प्रत्येक पुस्तक को उनके विषय तथा महत्ता के अनुरूप संग्रहीत किया गया है| हर पुस्तक को एक विशेष कूट संख्या से अंकित किया गया है, ताकि इतने सारे पुस्तकों में से सरलता से आवश्यक पुस्तक को खोज सकें| शोध के उद्देश्य से महत्त्वपूर्ण किताब एवं दस्तावेज अत्याधुनिक सर्वर के माध्यम से इ-लाइब्रेरी में भी उपलब्ध कराये जाते हैं| उनके साथ-साथ अत्यन्त दुर्लभ किताबों को समय-समय पर फ्यूमिगेशन तकनीकी से लंबे समय तक सँभाला जा रहा है| गॉंधीजी से जुड़ी प्राथमिक एवं द्वितीय जानकारीवाली किताबों का आधुनिक पद्धति से संरक्षण कर उनको सालोंे-साल टिका सके| इसलिए फाउण्डेशन द्वारा पेपर प्रिज़र्वेशन प्रयोगशाला स्थायी रूप से कार्यरत है|

पुस्तकालय के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए फाउण्डेशन विश्वविद्यालय एवं प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों को आमंत्रित करता है| पिछले माह में जर्मनी के वेल्फेनबिट्ल स्थित बिब्लियोथेक (पुस्तकालय) विभाग के अध्यक्ष एवं पुरातत्वविद् डॉ. गेब्रियल बाल ने अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी| डॉ. गेब्रियल ने १५ दिन के दौरान किताब एवं ऐतिहासिक दस्तावेजों को संभालने एवं सूचीबद्ध करने की पद्धति को फाउण्डेशन के सहकारियों के सामने प्रस्तुत की|

पुस्तकालय को समृद्ध बनाने के लिए गॉंधीजी के जीवन दर्शन से जुड़ी किताबों का संग्रह जारी है| ग्रंथालय के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने बताया कि पिछले कुछ समय में प्रकाशित नई किताबें एवं अन्य लोगों के पास से प्राप्त किताबों की संख्या मिलाकर कुल ९७२० तक पहुँची है| इसमें गॉंधीजी द्वारा लिखित, गॉंधीजी के जीवन दर्शन एवं विचारों पर किसी अन्य व्यक्तियों द्वारा लिखित, ज्ञानकोश के साथ अन्य संदर्भ ग्रंथ सम्मिलित हैंै| यह समृद्ध ग्रंथालय उत्तरोत्तर आगे बढ़ते हुए, प्रस्तुत अभ्यासक्रम एम. ए. एवं गॉंधियन समाजकार्य में पीजी डिप्लोमा के छात्रों के साथ

एम. फिल एवं पीएच. डी. शोधार्थियों के लिए विशाल संदर्भ प्रस्तुत कर रहा है|

प्रो. ग्रे कॉक्स का विशेष व्याख्यान

१९ फरवरी २०१६ के दिन गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन में ‘शांति के तरीके’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान प्रो. जॉन ग्रेहाम कॉक्स द्वारा दिया गया| प्रो. कॉक्स अमेरिका की एटलान्टिक यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए हैं| सामाजिक सिद्धांत एवं दर्शनशास्त्र से संबंधित कई किताबें आपने लिखी हैं| इनमें से "The Will at the Crossroads एवं "The Ways of Peace जैसी किताबें मुख्य हैं|

व्याख्यान के दौरान प्रो. ग्रे कॉक्स ने शांति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सरल अवधारणाओं और रूपकों द्वारा अपनी बात रखी| उन्होंने शांति को ‘युद्ध और संघर्ष के अभाव’ के रूप में प्रस्तुत किया| शांति एक अनुभव है जो मानव प्रयास के द्वारा निर्मित ‘मतभेद’ को ‘अनुपूरक’ में तबदील करता है| आपने पानी का दृष्टांत देते हुए कहा कि, ‘हाइड्रोजन’ और ‘ऑक्सीजन’ पदार्थ एक दूसरे से बहुत अलग हैं फिर भी जीवन बनाए रखने वाले तत्त्व पानी का निर्माण करने के लिए दोनों की मौजूदगी अनिवार्य है|

प्रो. कॉक्स के नजरिये से वर्तमान समय में तीन क्षेत्र में ज्यादा संकट छाया है - १) पर्यावरण संकट (जलवायु परिवर्तन), २) प्रशासन और सैन्य संकट, और ३) तकनीकी संकट| किन्तु, आपने बताया कि संकट का निवारण करने के लिए सभी को आशावादी होना जरूरी है॥

प्रो. कॉक्स ने जीवन के विभिन्न उपादानों पर शांति की अवधारणा को आत्मसात किया है, उनमें से कुछ इस तरह से हैं- एक-एक व्यक्ति से लोक संस्था का निर्माण, लोगों में नेटवर्क से वैश्विक शांति का फैलाव और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रयास प्रमुख हैं| आज हमारी शांति आधारित परिवर्तन की कल्पना असंभव मालूम होती है पर एक दिन यही परिवर्तन संभवतः अनिवार्य बन जायेगा|

‘शांति के तरीके’ विषयक विशेष व्याख्यान में फाउण्डेशन के कार्यकर्ता, विद्वानों एवं छात्रों के साथ कुल २५ लोगों ने भाग लिया| व्याख्यान को आयोजित करने में फाउण्डेशन के एसोसिएट डीन डॉ. जॉन चेल्लादुरै का महत्त्वपूर्ण सहयोग रहा|

‘अंतर्राष्ट्रीय’ चर्चा-सत्र संपन्न

आदरणीय बड़े भाऊ (भवरलाल जैन) के बिगड़ते स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुये प्रस्तावित संगीति कार्यक्रम की मूल योजना को स्थगित कर दिया गया था| विदेश एवं भारत के विभिन्न भागों से कूछ अतिथि अपनी यात्रा को जारी रखते हुए जलगॉंव फाउण्डेशन की मुलाकात के लिए पधारे थे| उपस्थित अतिथि एवं फाउण्डेशन के कार्यकर्ता को मिलाकर दो दिवसीय चर्चा सत्र का आयोजन किया गया| उस चर्चा सत्र पर प्रस्तुत है एक रिपोर्ट|

मानवता से संबंधित मुद्दो पर दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय चर्चा सत्र का आयोजन गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा दि. २५ और २६ फरवरी, २०१६ आयोजित कीया गया| इस सत्र में केनेडा, जर्मनी, इटली एवं भारत से कुल मिलाकर चौदह लोगों ने सहभाग लिया|

चर्चा सत्र का उद्घाटन गुजरात विद्यापीठ के पूर्व कुलनायक

डॉ. सुदर्शन आयंगार ने किया| अपने विचार प्रगट करते हुए डॉ. आयंगार ने पूर्ण स्वराज के ध्येय का विश्लेषण किया| उन्होंने कहा कि सामाजिक भेदभाव, अशिक्षा, अज्ञानता और हिंसा, ये सभी पहलू मानव जीवन शैली को अस्वस्थ बनाते हैं| डॉ. आयंगार ने अहिंसक जीवन शैली को वैश्विक विकास में मानवता का नेतृत्व करने एवं अनिवार्य चुनौतियों का सामना करने के अस्त्र के रूप में बताया|

उपस्थित प्रतिनिधियों में प्रो. सरस्वती राजू ने जाति भेद के दृष्टिकोण से स्वराज पर प्रकाश डाला| पी. वी. राजगोपाल ने छोटे किसान एवं दुर्बल लोगों के पुनरुत्थान के लिए स्वराज को परिभाषित किया| शहरीकरण के विषय से जुड़े पहलू पर डॉ. पुष्पा पाठक तथा शिक्षा संबंधित पहलू पर प्रो. गीता धरमपाल ने अपनी बात रखी| न्याय के संदर्भ में बात-चीत करते हुये डॉ. जोसेफ फ्लेस एवं डॉ. रेवा जोशी ने प्रणालीगत हिंसा में शान्ति को एकमात्र उपाय के रूप में प्रस्तुत किया| विज्ञान और प्रौद्योगिकीय जीवन में नैतिकता के बढ़ते मुद्दे पर राधाबेन भट्ट ने अपने विचार व्यक्त किये|

चर्चा-सत्र में वर्तमान चुनौतियों का सामना करने के लिए व्यावहारिक प्रतिक्रियाओं पर भी प्रकाश ड़ाला गया| इस आवश्यकता पर बल दिया गया कि विद्वानों, विचारकों और कार्यकर्ताओं को आमंत्रित करते हुए फाउण्डेशन एक ‘थिंक टैंक’ का निर्माण करे ताकि राष्ट्र के सामने आने वाली समस्याओं का अहिंसात्मक तत्त्वदर्शन के आधार पर उचित हल निकाला जा सके|

उक्त कार्यक्रम की रूपरेखा का निर्धारण एवं सूत्र-संचालन डॉ. सुदर्शन आयंगार एवं डॉ. जॉन चेल्लादुरै ने किया॥

विश्व जल दिवस पर कार्यक्रम संपन्न

२२ मार्च को दुनियां भर में विश्व जल दिवस मनाया जा रहा है| देश-दुनियां को जल संकट से बचाने के लिए अनेक विशेषज्ञ जुट रहे हैं| कई राज्य अभी से जबरदस्त सूखे की कगार पर हैं| इसलिये एक-एक बूंद जल के महत्त्व को समझते हुये हमें प्रकृति प्रदत्त जल का संरक्षण करना ही होगा| जल संकट को समझते हुए फाउण्डेशन ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के तहत आसपास के गॉंवों में विश्व जल दिवस के अवसर पर सामाजिक जागृति कार्यक्रम के माध्यम से पानी के महत्त्व एवं मितव्यता पूर्वक उपयोग का संदेश फैलाया|

जलगॉंव तालुका के दापोरा, धानोरा, खर्ची, एवं जलके में कलश पूजन कर, स्कूली छात्रों को जल के महत्त्व और उसके इस्तेमाल की जानकारी दी गई| इस विषय पर स्कूली छात्रों के लिए विविध स्पर्धा जैसे निबंध, वाग्मिता, चित्रकला आदि स्पर्धा का आयोजन रखा गया था| तीनों स्पर्धाओं में अनुक्रम से ६९, २४ एवं १२७ छात्रों ने हिस्सा लिया| रैली के माध्यम से पानी का महत्त्व दर्शाने वाले संदेश प्रस्थापित किए गये| २१ और २२ मार्च, दो दिन तक चले इस कार्यक्रम में गॉंव के सरपंच, उप-सरपंच, स्कूल व्यवस्थापन समिति के अध्यक्ष, ग्रामजन, शिक्षक वृंद, छात्र और फाउण्डेशन के कार्यकर्ताओं ने पानी का समझ पूर्वक उपयोग करने के संकल्प के साथ जल प्रतिज्ञा ली|

कार्यक्रम को सफल करने के लिए फाउण्डेशन के कार्यकर्ता विश्वजीत पाटील, सागर चौधरी, राजेंद्र जाधव, राहूल लांबोले के साथ पीजी डिप्लोमा के छात्र एवं जिला पंचायत प्राथमिक स्कूल के शिक्षक समूह ने उल्लेखनीय भूमिका अदा की|

ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम

फाउण्डेशन के ग्राम स्वराज्य कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण स्वच्छता प्रकल्प पर पॉंच गॉंव (धानोरे, दापोरे खु. और दापोरे बु. कुर्हाड़दा और लामंझन) में कार्य शुरू किया गया है| एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था ग्लोबल गिविंग के सहयोग से ग्रामीण स्वच्छता सुनिश्चित करने के क्रम में पहले धानोरे, दापोरे खुर्द. और दापोरे बुदरुक में दलित बस्ती सुधार

योजना के अंतर्गत बनाए गए और लम्बे समय से बंद पड़े महिला शौचालय को पर्याप्त जल और बिजली की व्यवस्था के साथ नवीनीकृत कर चालू किया गया|

इस कार्य को पूरा करने के लिए विभिन्न चरणों में ग्रामीण महिलाओं को संगठित किया गया| इस कार्य को निरंतर बनाए रखने के लिए पंचायत पदाधिकारी को भी सम्मिलित किया गया| इसके लिए ग्राम सभा में भी इन महिला शौचालयों के नवीनीकरण का प्रस्ताव पारित किया गया| यह अति आवश्यक है कि लोग खुद से पहल करें, और संस्थाएँ उन्हें मदद करें| फाउण्डेशन के कार्यकताओं ने दिन-रात मेहनत कर लोगों को संगठित किया और उनकी भागीदारी को सुनिश्चित किया| उपयोगकर्ता के रूप में ग्रामीण महिलाओं ने १० प्रतिशत अपना सहयोग दिया| बिजली, पानी, शौचालय के देखभाल और साफ सफाई की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत ने ली|

जल और स्वच्छता दिवस के अवसर पर विद्यालय और ग्रामीण युवकों के साथ मिलकर जागरूकता रैली निकाली गई| इस रैली और विभिन्न बैठक के माध्यम से ग्रामीण स्वच्छता को सुनिर्धारित करने के लिए उन्हें प्रेरित किया गया| इस प्रयास का परिणाम यह हुआ कि दिनांक २३ मार्च २०१६ को धानोरा में एक और दापोरा में दो शौचालय पूर्ण रूप से ग्रामीण महिलाओं को प्रदान किए गये|

कांताई ग्राम समृद्धि योजना

ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण कार्य के लिये फाउण्डेशन द्वारा कांताई ग्राम समृद्धि योजना वर्ष २०१४-१५ में कार्यान्वित की गई थी| अर्पण फाउण्डेशन अमेरिका, भगिनी निवेदिता ग्रामीण विज्ञान निकेतन, बहादरपुर और गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के संयुक्त प्रयासों से पाचोरा शहर एवं फाउण्डेशन के कार्यक्षेत्र में स्थित नजदीक के गांवों की महिलाओं के स्वावलंबन के लिये स्वयं सहाय समूह स्थापित किए गये| लघु उद्योगों जैसे किराना दुकान, सिलाई मशीन, पशुपालन आदि व्यवसायों में होने वाले प्रारंभिक निवेश के लिए फाउण्डेशन द्वारा शुरुआती तौर पर माइक्रोफाइनेन्स के द्वारा आर्थिक मदद दी जा रही है|

अब तक कांताई ग्राम समृद्धि योजना के अंतर्गत इस योजना के माध्यम से ७१ महिला स्वयं सहायता समूह के ७९९ महिलाओं को करीब पचहत्तर लाख रुपए का लाभ मिला है| इस योजना के तहत दी हुई सहायता महिलाएं ११ सुलभ किश्तों में लौटा रही हैं|

मूल्य वर्धन शिक्षण कार्यक्रम

गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत गांवों के १२ स्कूलों में भारतीय जैन संघटना निर्मित मूल्य वर्धन कार्यक्रम दो सालो से चलाया जा रहा है| वैसे तो यह कार्यक्रम भारतीय जैन संघटना द्वारा वर्ष २०१० से जलगांव के कुछ स्कूलों में चलाया जा रहा था किन्तु कुछ कारणों से इस कार्यक्रम को आगे चलाने में उन्होंने असमर्थता दर्शायी| तब से यह कार्यक्रम फाउण्डेशन द्वारा चलाया जा रहा है|

स्कूल के बच्चे इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से मूल्यलक्षी शिक्षा का पदार्थ पाठ प्राप्त कर रहे हैं| उनके व्यवहार में नागरिक के प्रति फर्ज एवं कर्तव्य के प्रति सकारात्मक बदलाव दिखायी दे रहा है| शिक्षक वर्ग को यह बदलाव अच्छा लगा, उन्होंने इस कार्यक्रम की सहृदय प्रशंसा की| इस अभ्यास क्रम पढ़ाने वाले शिक्षक विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किए हुये हैं|

अब तक २४३२ विद्यार्थियों को मूल्य शिक्षण कार्यक्रम से लाभ मिल चुका है| फाउण्डेशन ने इस कार्यक्रम को चलाने हेतु दस विशेष शिक्षक नियुक्त किए हैं| कार्यक्रम की सफलता के लिये क्रमिक साप्ताहिक बैठक आयोजित की जाती है| इस कार्यक्रम के लिये संस्था द्वारा बच्चों को शैक्षणिक साहित्य प्रदान किया जाता है|

गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा २०१५-१६

गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन की ओर से महाराष्ट्र की सभी पाठशालाओं एवं महाविद्यालयों में हर साल गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा का आयोजन किया जाता है| इसके पीछे हमारा मूल उद्देश्य आनेवाली पीढ़ियों में गॉंधीजी के जीवन मूल्यों एवं आदर्शों का बीजारोपण कर उन्हेंे एक सभ्य और आदर्श नागरिक बनाना है| आज विश्‍व का एक बड़ा वर्ग यह स्वीकार करने लगा है कि महात्मा गॉंधी द्वारा सुझायेे गये सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही विश्‍व का शाश्‍वत विकास किया जा सकता है|

इस परिपत्रक द्वारा महाराष्ट्र के सभी पाठशालाओं तथा महाविद्यालयों में गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा में अधिकाधिक छात्रों को सम्मिलित करने हेतु आदेश दिये गए हैं| इन परीक्षाओं के माध्यम से सत्य, अहिंसा, बंधुत्व आदि मानवीय मूल्यों को बच्चों में प्रचारित-प्रसारित करने के लिये रयत शिक्षण संस्था, सातारा; मराठा विद्या प्रसारक समाज, नाशिक; महात्मा गॉंधी शिक्षण मंदिर, नाशिक, स्वामी विवेकानंद शिक्षण संस्था, कोल्हापूर; मराठवाडा शिक्षण प्रसारक मंडल, औरंगाबाद; सह्याद्री शिक्षण संस्था, सावर्डे; चिपलुण, सरस्वती भुवन शिक्षण प्रसारक संस्था, औरंगाबाद; भारती विद्यापीठ, पुणे; कृषि विकास ट्रस्ट, बारामती; महात्मा फुलै शैक्षणिक व सामाजिक मंडल, चालिसगांव; श्री शिवाजी शिक्षण संस्था, अमरावती; शिरपुर एज्युकेशन सोसायटी, शिरपुर; दि. सेकंडरी एज्यूकेशन सोसायटी, शेंदुर्णी; कस्तूरबा गॉंधी नॅशनल मेमोरीयल ट्रस्ट, इंदौर आदि शिक्षण संस्थाओं ने निजी तौर पर विशेष परिपत्र जारी किये थेे| वर्ष २००७ से आयोजित हो रही इन परीक्षाओं के जो नतीजे अब सामने आ रहे हैं उससे हमें विशेष आनंद मिला है| मराठा विद्या प्रसारक समाज, नाशिक इस विशाल शिक्षण संस्था की जनरल सेक्रेटरी मा. सौ. निलिमाताई पवार ने गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा के मूल्यों को उचित रूप से समझकर तथा खुद गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन को देखने के बाद खुद का नाम इस परीक्षा के लिये पंजीकृत करवाया तथा संस्था के सभी स्कूल एवं महाविद्यालयों को गॉंधी तीर्थ के शैक्षणिक दौरे के लिये एक विशेष परिपत्रक भी जारी किया| अपने अत्यंत व्यस्त कार्यक्रमों से समय निकाल कर उन्होंने इस प्रकल्प पर ध्यान देकर एक आदर्श स्थापित किया है|

रयत शिक्षण संस्था, सातारा एक विशालतम शिक्षण संस्था है| इसकी एक इकाई न्यू इंग्लिश स्कूल, टाकलीभान, जि. अहमदनगर के मुख्याध्यापक पंढरीनाथ निंगत तथा सौ. सरोज अहिरे के नेतृत्व में कई लोगों ने परीक्षा के लिये अपने नाम दर्ज करवाये| इसी संस्था के साधना विद्यालय के ब्वायज-गर्ल्स तथा इंग्लिश मीडियम के लगभग १२ हजार से भी अधिक छात्र हर साल इस परीक्षा में सम्मिलित होते हैं| इस संस्था के अध्यक्ष मा. श्री. शरद पवारजी तथा महान कर्मयोगी, शिक्षाविद कर्मवीर भाऊराव पाटीलजी के प्रपौत्र मा. डॉ. अनिल पाटील ने संस्था के सचिव, सहायक सचिव के साथ मिलकर गॉंधी मूल्यों के बीजारोपण के लिये विशेष रूप से प्रयत्न किया| शिक्षण संस्थाओं के जनरल सेक्रेटरी, पाठशालाओं के अध्यापक तथा महाविद्यालयों के प्राध्यापकों का भी गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा में सहभाग यह दर्शाता है कि वर्तमान समय में गॉंधी विचार तथा उनके द्वारा प्रदत्त संस्कारों की महती आवश्यकता समुदाय की सभी इकाइयों के लिए हैं|

आदर्श एज्युकेशन सोसायटी के कला, वाणिज्य और विज्ञान महाविद्यालय, हिंगोली के प्राचार्य डॉ. बी. एन. बर्वे तथा समन्वयक

प्रा. जी. पी. चव्हाण की प्रेरणा से महाविद्यालय के प्राध्यापक गण भी परीक्षा में सहभागी हुये|

इस परीक्षा के लिये महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार तथा गोवा इन ७ राज्यों के ५० जिलोंे से २०१५-१६ के लिये २,१०,८७० तथा विगत २००७ से लेकर अबतक के लिये ६४६९ केन्द्रों से ८,०२,१५९ छात्रों ने सहभाग लिया|

२००७ से २०१५-१६ के परीक्षा व साल के गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा का विवरण (परीक्षाओं का अबतक का रिकॉर्ड)

वर्ष परीक्षा केंद्र सहभागी छात्र

२००७ ७३ ३८७६

२००८ १४१ ९२४०

२००९ १३५ ९०७०

२०१० ३६९ ३१३५४

२०११ ९६१ ७९७४१

२०१२ १०४१ १००९५३

२०१३ १०३४ १३७७७४

२०१४ १४०१ २०१४६०

२०१५ १२३२ २१०८७०

कुल ६३८७ ८,०२,१५९

गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. भवरलालजी जैन ने जिस दूरदृष्टि से इन परीक्षाओं की शुरुआत की थी यदि छात्रों से पहले अध्यापकों में इन विचार-संस्कारों के बीज बोए गये तो सुसंस्कारित पीढ़ियों के निर्माण का कार्य अत्यंत आसान हो जायेगा| सम्भवत: यह दृष्टिकोण आज सफल हो रहा है|

परीक्षा प्रमाणपत्र वितरण

गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा के प्रमाणपत्र का वितरण कार्यक्रम

राज्य के हर प्रदेश के प्रमुख केन्द्रों पर आयोजित किया जाता है|

वर्ष २०१५ के लिये निम्न विभिन्न जगहों पर यह पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न हुआ -

बेलगॉंव: दि. ७.०१.२०१६ के दिन मराठी विद्या निकेतन, बेलगॉंव में ज्येष्ठ गॉंधीवादी डॉ. अशोक देशपांडे की उपस्थिति में प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम संपन्न हुआ|

कोल्हापूरः दि. ८.०१.२०१६ के दिन आदर्श गुरुकुल अकादमी वडगॉंव, ता. हातकणंगले में संस्था के चेयरमैन मा. डॉ. डी. एस. घुगरे एवं मुख्याध्यापिका सौ. आर. डी. घुगरे की उपस्थिति में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ|

नागपूरः दि. ६.०२.२०१६ के दिन जी. एस. कॉलेज ऑफ कॉमर्स में ज्येष्ठ गॉंधीवादी समाजसेविका श्रीमती लिलाताई चितले, डॉ. सौ. नेहा कल्याणी, डॉ. एन. डी. धर्माधिकारी, डॉ. एन. वाई. खंडित की उपस्थिति में प्रमाणपत्र वितरण समारोह संपन्न हुआ|

धुलेः दि. १४.०२.२०१६ के दिन आर. सी. पटेल इन्स्टीट्युट ऑफ टेक्नॉलॉजी, शिरपूर में उत्तर महाराष्ट्र विद्यापीठ, जलगॉंव के माजी कुलगुरु डॉ. के. बी. पाटील, आर. सी. पटेल इन्स्टीट्युट ऑफ टेक्नॉलॉजी, शिरपूर के प्राचार्य डॉ. जे. बी. पाटील, डॉ. बी. के. सूर्यवंशी की उपस्थिति में प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम संपन्न हुआ|

लातूरः दि. २०.०२.२०१६ के दिन महाराष्ट्र विद्यालय निलंगा,

जि. लातूर में मुख्याध्यापक एच. के. पाचंगे, आर. ए. बिराजदार एवं शिवाजी कॉलेज निलंगा में शिवाजी शिक्षण संस्था प्रसारक मंडल-बार्शी के डॉ. बी. वाई. यादव, प्राचार्य डॉ. पी. आर. थोरात की उपस्थिति में प्रमाणपत्र वितरण कार्यक्रम संपन्न हुआ|

जलगॉंवः दि. २३.०२.२०१६ को नंदिनीबाई वामनराव मुलींचे हाईस्कूल, जलगॉंव में गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के विश्‍वस्त मा. दलुभाऊ जैन, नंदिनीबाई वामनराव हाईस्कूल की मुख्याध्यापिका सौ. वाई. एस. सोनवणे की उपस्थिति में प्रमाणपत्र का वितरण किया गया|

इन सभी पुरस्कार वितरण समारोहों में आये हुए विशेष अतिथियोंे का फाउण्डेशन की ओर से भुजंगराव बोबडे तथा चंद्रशेखऱ पाटील ने स्वागत किया तथा गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा के मूल उद्देश्य और परिणाम के बारे में अपने विचार छात्रों के सामने प्रस्तुत किये|

इस समारोह में कुल लगभग १३,२०० छात्र तथा ४९० अध्यापकगण उपस्थित रहे|

परीक्षा के सम्बध में प्रतिक्रियाएँ

आपको बताने में हमें आनंद का अनुभव हो रहा है कि पिछले ३ सालों से गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन, जलगॉंव द्वारा गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा का यह अनूठा/अभिनव प्रयोगरूप आयोजन सफलता पूर्वक किया जा रहा है| इसमें कोई संदेह नहीं कि महात्मा गॉंधी के विचारों को जीवित रखने का सराहनीय प्रयास आपके द्वारा हो रहा है| यह बहुत महत्त्वपूर्ण है|

मुख्याध्यापक, इंदाई देवी माध्यमिक विद्यालय, धुलिया

श्री शिवाजी शिक्षण संस्था, अमरावती द्वारा संचालित स्थानीय मातोश्री विमलाबाई देशमुख महाविद्यालय में गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा का २ अक्टूबर को गॉंधी जयंती के

अवसर पर आयोजन किया गया| परीक्षा हेतु छात्रों ने गॉंधीजी के जीवन मूल्यों पर आधारित किताबे पढ़ीं तथा वह अपने जीवन में भी उन

विचारों को आचरण में लाने का संकल्प किया| युवाओं में गॉंधीजी के विचारों का मंथन और आचरण आज अत्यावश्यक है| छात्रों में राष्ट्रप्रेम

की भावना जागृत होना जरूरी है क्योंकि वही आनेवाले भारत का

भविष्य हैं|

प्रो. डॉ. अरुणा देशमुख, विमलाबाई देशमुख महाविद्यालय, अमरावती

महात्मा गॉंधी के आदर्श जीवनमूल्यों का संदेश फैलाने के लिये जलगॉंव स्थित गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा जिला परिषद प्रशाला, उमरगा में गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा का आयोजन किया गया| महात्मा गॉंधी का जीवन संदेश छात्रों तक पहुँचाने के साथ साथ, छात्रों को सत्य, अहिंसा, शांति, प्रेम, बंधुत्व, सामंजस्य तथा स्वदेशी आदि शिक्षा प्राप्त करने के लिये तथा छात्रों कोे संस्कार सक्षम बनाने में यह परीक्षा बहुत कारगर सिद्ध हुई है|

वनराज तेलंग, जिला परिषद विद्यालय, उमरगा, जि. उस्मानाबाद

हमारे महाविद्यालय में गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा आयोजित गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा के अभिनव उपक्रम में हमारे कनिष्ठ और वरिष्ठ दोनों विभागों के छात्रों ने सहभाग लिया है| पिछले पॉंच सालों से यह उपक्रम आयोजित कर रहे हैं तथापि इस साल छात्रों के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गॉंधी के विचार कार्यशाला का आयोजन गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के सहयोग से हो यह एक विनम्र अपेक्षा है|

प्राचार्य, सी. डी. जैन कॉलेज ऑफ कॉमर्स, श्रीरामपूर

हमारे यहॉं हर साल गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा का आयोजन किया जाता है| आपसे बिनती है कि इस परीक्षा का एक माध्यम उर्दू भी अवश्य रखें जिससे महाराष्ट्र की सभी उर्दू माध्यम की पाठशालायें भी इसमें शामिल हो सकें| गॉंधीजी के सिद्धातों का, विचारों का प्रसार-प्रचार करने का आपका जो महान उद्देश्य है वह भी पूरी तरह से इससे सफल हो जायेगा| हम इस कार्य के लिये आपको सभी तरह से धन्यवाद और सहयोग देते रहेंगे|

मुख्याध्यापक, उर्दु माध्यमिक विद्यालय, उंबर्डे, जि. सिंधुदुर्ग

गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा अब कर्नाटक में भी

पिछले ४ वर्षों से गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन, कर्नाटक के बेलगॉंव जिले में गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा आयोजित कर रहा है| अब इस परीक्षा को बेंगलोर के गॉंधी भवन के सहयोग से आयोजित करना चाहते हैं| इसलिए दि. १४ मार्च को गॉंधी भवन, बेंगलोर में सर्वोदय मंडल तथा कर्नाटक गॉंधी स्मारक निधि के सभी प्रमुखों की बैठक आयोजित की गयी| गॉंधी भवन तथा गॉंधी स्मारक निधि के अध्यक्ष एच. श्रीनिवासय्या और सचिव प्रो. जी. बी. शिवराजू इसके दो प्रमुख स्तम्भ हैं| ये दोनों व्यक्ति २०१४ तथा २०१५ में जब गॉंधी तीर्थ आये थे, तब उन्होंने गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा के बारे में जाना और उन्हें लाखों छात्रोंे तक गॉंधी विचार पहुँचानेवाला यह प्रकल्प बहुत अच्छा लगा| इस अवसर पर फाउण्डेशन के भुजंगराव बोबडे ने परीक्षा का उद्देश्य, उसका स्वरूप, समयानुसार नियोजन आदि बातें उनके सामने रखी|

गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा से संबंधित एक संयुक्त चर्चा का आयोजन १५ मार्च, २०१६ को मैसूर विद्यापीठ में पुरे राज्य के महाविद्यालयों के एन. एस. एस. विभाग और विद्यापीठ के गॉंधी अध्ययन केंद्र की ओर से किया गया| इस अवसर पर यह निर्णय लिया गया कि यदि फाउण्डेशन यह परीक्षा पूरे राज्य में आयोजित करता है तो राज्य के सभी ३० जिलों में सहयोग हेतु १ राज्य समन्वयक और ३० जिला समन्वयक नियुक्त किए जायेंगे|

१६ मार्च, २०१६ को कस्तूरबा गॉंधी नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट, कर्नाटक राज्य के सभी विद्यालयों के प्रमुखों की एक बैठक अर्सिकेरी, जिला हसन में बुलाई गयी| इस बैठक में उनके सभी केन्द्रों में परीक्षा आयोजन को सहर्ष अनुमति प्रदान की गयी| एन. एस. एस. के कई प्रमुख शिविरों में प्रत्यक्षत: जाकर कुछ महाविद्यालयों, शिक्षण संस्थाओं तथा गुरुकुल के प्रमुखों से गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा के बारे में सफलता पूर्वक विचार विमर्श हुआ| कुछ व्यक्तियों से फोन पर बात कर गॉंधी भवन के सचिव प्रो. जी. बी. शिवराजू जी ने यह कहा कि महाराष्ट्र में आपने जितने छात्रों को इस परीक्षा में शामिल किया है, हम उतने या उससे भी अधिक छात्र कर्नाटक में शामिल करेंगे| इसके लिये कर्नाटक के शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव तथा जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री के साथ एक संयुक्त सभा का हम आयोजन करेंगे| मेरा आग्रह है कि आप गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के प्रमुख संचालक के साथ उस समय जरूर उपस्थित रहें|

गॉंधी विचार संस्कार परीक्षा के कर्नाटक में आयोजन हेतु सभी वरिष्ठजनों के मार्गदर्शन में जो प्रयास हम कर रहे हैं, वह निश्चित ही आप सभी के सहयोग से सफल होंगे|

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