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Articles - एन.एस.एस. के छात्रों के साथ गॉंधी जयंती

महात्मा गॉंधी जयंती के अवसर पर मणियार लॉ कॉलेज, जलगॉंव में एन.एस.एस. के छात्रों के लिये ‘महात्मा गॉंधी एवं सेवा भाव’ विषयक एक व्याख्यान का आयोजन किया गया| इस व्याख्यान में प्रमुख वक्ता थे गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के कार्यकर्ता अश्विन झाला| कार्यक्रम का प्रारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ| महाविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. रेड्डी ने पूर्व भूमिका में गॉंधी-जयंती के महत्त्व को छात्रों के सामने प्रगट किया| अपने प्रमुख वक्तव्य में अश्विन झाला ने राष्ट्रीय सेवायोजना के उद्देश्य व महात्मा गॉंधी के विचार दर्शाते हुए कहा कि ‘महात्मा गॉंधी के अनुसार अध्ययनकाल केवल बौध्दिक विकास का समय नहीं बल्कि भावी जीवन के निर्माण का काल है| वे चाहते थे कि छात्र देश के सामाजिक और आर्थिक अक्षमता के संबंध में, केवल चर्चा न करें बल्कि कुछ ऐसे रचनात्मक कार्य भी करें जिससे ग्रामीणों के जीवनस्तर को सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से उन्नत बनाया जा सके|’

सेवा का क्षेत्र अत्यन्त विशाल है और गॉंधीजी ने सेवा की परिभाषा को नये सिरे से प्रस्तुत करते हुए कहा कि ‘दूसरों की सेवा में खुद को खो देना है’| गॉंधी विचार यह चेतना प्रदान करता है कि विकास का रास्ता हमें स्वयं बनाना है| किसी समाज या देश की समस्याओं का समाधान कर्म-कौशल, व्यवस्था-परिवर्तन, वैज्ञानिक तथा तकनीकी विकास, परिश्रम तथा निष्ठा से सम्भव है| गॉंधीदर्शन विश्‍व को यह दृष्टि प्रदान करता है कि विकास का अर्थ केवल मशीनों के द्वारा अधिक उत्पादन करना नहीं है| विकास केवल साधन है, और विकास का लक्ष्य मनुष्य है| विकास साधन है और साध्य है-मनुष्य की समग्र उन्नति| वक्तव्य के अंत में अश्विन झाला ने सवाल-जवाब के माध्यम से गॉंधीजी के जीवन से जुड़े छात्रों के सवालों का विश्वसनीय समाधान दिया|

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