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Articles - गॉंधीजी और समाजकार्य पर व्याख्यान संपन्न

जलगॉंव स्थित धनाजीनाना समाजकार्य महाविद्यालय द्वारा गॉंधी जयंती के अवसर पर एक व्याख्यान का आयोजन ‘समाजकार्य में महात्मा गॉंधी का योगदान एवं गॉंधीजी के रचनात्मक कार्यक्रम की प्रस्तुतता’ विषय पर किया गया| महाविद्यालय के मुख्याध्यापक डॉ. विजयशिंगनापुरे ने विषय एवं कार्यक्रम के मुख्यवक्ता डॉ. जॉन चेल्लदूरै, संकाय-सहायक अध्यक्ष, गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन का परिचय दिया| इस कार्यक्रम में १२० समाजकार्य छात्र एवं ५ फैकल्टी मेम्बर्स उपस्थित थे|

अपने मुख्य वक्तव्य में डॉ. चेल्लदूरै ने कहा कि महात्मा गॉंधी ने अपने जीवन में सत्य एवं अहिंसा की पल-पल अनुभूति की थी| गॉंधीजी के अनुसार सत्य ही ईश्वर है, और आसपास की बृहद् जीव-सृष्टी इसका जीवंत उदाहरण है| निश्चित अर्थ में ‘जीवन’ सत्य की निकटतम अभिव्यक्ति है और अहिंसा सत्य का व्यावहारिक रूप है, इसलिए सत्य और अहिंसा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं|

गॉंधीजी द्वारा दिये गये अठारह ‘रचनात्मक कार्यक्रम’ आम आदमी के जीवन में सुधार के साधन हैं| गरीबी, भेदभाव और अज्ञानता जैसी सामाजिक समस्याओं से लोगों को मुक्त कराने एवं ‘पूर्णस्वराज’ की प्राप्ति के लिए ‘रचनात्मक कार्यक्रम’ हमेशा से एक सबसे अच्छा तरीका रहा है| अपने विचार प्रगट करते हुए डॉ. शिंगनापुरे ने गॉंधीजी के एकादश व्रत के महत्त्व को बताते हुये ग्यारह व्रतों को किसी भी स्वतंत्रता सेनानी के लिए आवश्यक योग्यता बताया क्योंकि ये व्रत जीवन को नये रूप में सामाजिक अनुशासन प्रदान करते हैं|

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