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Articles - राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर कार्यशाला संपन्न

मानव इतिहास के आदिकाल से शिक्षा का विविध भांति विकास एवं प्रसार होता रहा है| प्रत्येक देश अपनी सामाजिक-सांस्कृतिक अस्मिता को अभिव्यक्ति देने, उसे पनपाने तथा चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी विशिष्ट शिक्षा प्रणाली विकसित करता है| लेकिन देश के इतिहास में कभी-कभी ऐसा समय आता है, जब मुद्दतों से चले आ रहे उस सिलसिले को एक नई दिशा देने की नितान्त जरूरत हो जाती है| आज हमें फिर से एक बार शिक्षा के लिए नयी नीति तैयार करने का समय आ गया है|

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बदलाव करने की दिशा में पहल की| इस प्रयास को देश के विभिन्न प्रान्तों से फीडबैक मिल रहा है| गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत है, और हम यह भी महसूस करते हैं की बुनियादी शिक्षा ही एक मात्र पर्याय है| राष्ट्रीय शिक्षा नीति बदलनी चाहिए, उसमें महत्त्वपूर्ण सुझाव आने चाहिए, इसी उद्देश से गॉंधी तीर्थ पर एक दिवसीय ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति - संवाद’ का आयोजन किया गया| प्रस्तुत संवाद कार्यक्रम में उत्तर महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. के. बी पाटील, बेण्डाले महिला महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस आर राणे, इकरा शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष गफार मलिक, अनुभूति स्कूल की संचालिका श्रीमती निशा जैन एवं प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं के अध्यापक एवं शिक्षकवृंद उपस्थित रहे|

गॉंधीजी का मानना था कि हर देश की पूरी शिक्षा-व्यवस्था उसे तरक्की की तरफ ले जाने वाली होनी चाहिए| इसी आधार पर १९३७ में समग्रता के साथ गॉंधीजी ने नयी तालीम शिक्षा योजना देश व दुनियां के समक्ष प्रस्तुत किया| बुनियादी शिक्षा एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करती है| उसका उद्देश दस्तकारी के माध्यम से बालकों का शारीरिक, बौद्धिक और नैतिक विकास करना है|

उपरोक्त तत्त्वों को ध्यान में रखकर उपस्थित प्रमुख शिक्षाविदोंं द्वारा निम्न प्रस्ताव को मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजे गये|

१) नागरिक शिक्षा को बढ़ावा देना| शिक्षा जिससे बालक के शरीर, मन और आत्मा का पूरा विकास हो|

२) एरीप ुहळश्रश र्ूेी श्रशरीप की समझ को कार्यांन्वित करें

क्योंकि स्वावलंबन शिक्षा की ओर आगे बढ़ने का यही पर्याय है| परिश्रम आधारित शिक्षा की पहल हो जिससे छात्र और शिक्षक के बीच परस्पर लगाव बढ़े|

३) शिक्षा को मजबूत करने के लिए शिक्षक विभिन्न पहलुओं के आधार पर चरित्र निर्माण करें जिससे चारित्र्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जा सके|

४) सभी प्रादेशिक भाषा में एक कॉमन पोर्टल बने जहॉं विज्ञान, गणित एवं अन्य विषय की महत्त्वपूर्ण सामग्री मिले|

उपरोक्त संकलित मुद्दों को आगे बढ़ा ते हुए फाउण्डेशन के प्रतिनिधि प्रा. अश्विन झाला ने नई तालीम समिति, सेवाग्राम द्वारा आयोजित दो दिवसीय परिसंवाद में प्रस्तुत किये|

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