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Articles - ४६ वां अखिल भारतीय सर्वोदय समाज सम्मेलन

अखिल भारतीय सर्वोदय समाज का यह ४६ वां सम्मेलन हरिजन सेवक संघ (गॉंधी आश्रम) दिल्ली में पहली बार आयोजित किया गया| सम्मेलन का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर सुलभ इंटरनेशनल के

स्थापक बिन्देश्वर पाठक ने किया| अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गॉंधी के रास्ते पर चलकर ही अहिंसक समाज की रचना की जा सकती है| समाज की बेहतरी और देश की संपन्नता के लिए इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए|

अधिवेशन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी ने कहा कि सर्वोदय समाज एक विचारधारा है| मौजूदा चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश को राजनीतिक आजादी तो मिली, लेकिन अन्य गुलामी से मुक्ति नहीं मिली| गॉंधी विचार पर चिंतन करें और आगे का रास्ता तय करें यही इस सम्मेलन का मकसद है| सम्मेलन में पूरी दुनियां के लगभग पांच हजार गॉंधीजनों ने हिस्सा लिया|

सम्मेलन में वक्ताओं ने अन्तर्राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति जागरुकता और चिंता जताते हुए कहा कि पूरे विश्व में तनावरहित वातावरण, निशस्त्रीकरण तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के वातावरण की आवश्यकता है| लोग ऐसे विश्व में रहना चाहते हैं, जहॉं शांति और अहिंसा हो| पूरी दुनियां के विचारक इस बात को लेकर एकमत हैं कि दुनियां को विनाश से मात्र महात्मा गॉंधी के सत्य, अहिंसा व करुणा की भावना से ही बचाया जा सकता है|

सम्मेलन की सफलता के लिये आयोजकों द्वारा आवश्यक धनराशि के लिए आह्वान किया गया| इस आह्वान का सम्मान करते हुए गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन ने आवश्यक सहायता राशि के साथ-साथ सम्मेलन की प्रमुख व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए, फाउण्डेशन के सहकारियों को सात दिन पहले से ही सम्मेलन स्थल पर स्वयंसेवक के रूप में भेजकर अपना योगदान दिया|

तीन दिनों तक हरिजन सेवक संघ के परिसर में उत्सव सरीखा माहौल रहा| तीनों दिन संवाद चलता रहा| इस दौरान देश-दुनियां से आए कई महत्त्वपूर्ण लोगों ने अपने विचार रखे|

इस अवसर पर प्रकाशित स्मारिका, समग्र सर्वोदय दर्शन और

सर्वोदय डायरी का भी लोकार्पण किया गया|

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