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Articles - जमनाबेन कुटमुटिया लोकसेवक पुरस्कार २०१५

‘गावो विश्वस्य मातरम्|’

पंडित मदन मोहन मालवीयजी ने कहा है: ‘यदि हम गौओं की रक्षा करेंगे तो गौएँ भी हमारी रक्षा करेंगी|’ ‘महात्मा गॉंधी ने गाय को मानवीय सृष्टि का पवित्रतम रूप बताया है| उन्होंने १९२१ में ‘यंग इंडिया’ पत्रिका में लिखा-गाय करुणा का काव्य है| यह सौम्य पशु मूर्तिमान करुणा है| वह करोड़ों भारतीयों की मॉं है| गौ-रक्षा का अर्थ है ईश्वर की समस्त मूक सृष्टि की रक्षा|

भारत देश की संस्कृति गाय पर पूरी तरह अवलम्बित है| इसी कारण शास्त्रों में गाय का महिमामंडन किया गया है| कृषि प्रधान देश होने के कारण गाय अनेक रूपों में उपयोगी है| किन्तु पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव से भारत जैसे देश में भी गाय का अस्तित्व संकट में पड़ गया है|

इसके बावजूद कुछ लोगों ने अपना सम्पूर्ण जीवन गो-सेवा एवं अहिंसा के कार्य में समर्पित कर दिया है| गो-संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने के लिए वे तन-मन-धन से लगे हुए हैं| किसानों के बीच में जाकर गाय और बैलों का महत्त्व समझाते हैं, उसके बारे में चर्चा करते हैं| इसी तरह के कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए गोसेवक स्व. जमनाबेन कुटमुटिया की स्मृति में महाराष्ट्र गो विज्ञान समिति का निर्माण हुआ| गत २२ वर्षों से इस संस्था की ओर से जमनाबेन कुटमुटिया लोकसेवक पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है| इस कार्य को भवरलाल एवं कान्ताबाई जैन मल्टीपर्पज फाउण्डेशन द्वारा सहकार्य किया जा रहा है| विनोबा भावे के जन्म दिन ११ सितम्बर को यह पुरस्कार समारोह गॉंधी तीर्थ के कस्तूरबा सभागृह में संपन्न हुआ| जमनाबेन कुटमुटिया लोकसेवक पुरस्कार २०१४ के लिए पं. बंगाल के सर्वोदय कार्यकर्ता चंदनपालजी को तथा वर्ष २०१५ का पुरस्कार यशवंत जोशी और सुधाकर झाडे को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया|

चंदनपालजी आसाम के अत्यंत हिंसाग्रस्त विभाग कोकराझार में शांति और अमन का कार्य कर रहे है| इस क्षेत्र में पहचाने जानेवाले बोडो मुस्लिम संप्रदाय के बीच हुए हिंसाचार में ११४ लोगों की हत्या हो गयी थी| यहॉं शांति प्रदान हेतु चंदनपालजी ने २०१२ से लगातार आसाम शांति यात्रा, युवा शिविर, ग्राम प्रमुखों को लेकर ग्राम सभाएँ की, यह कार्य सातत्यपूर्वक जारी रखा| इसका परिणाम यह हुआ कि, यहॉं शांति, सहिष्णुता, सद्भावना और भाईचारा प्रस्थापित होने लगा|

वर्ष २०१५ का सम्मान प्राप्त करनेवाले यशवंत जोशी ने अपना पूरा आयुष्य गोरक्षा, विनोबा वाड़्मय के प्रचार-प्रसार एवं कृषि को समर्पित किया| जोशी काका ने १९८२ से देवनार गोरक्षा सत्याग्रह में सक्रिय योगदान दिया है| इसके पश्चात् पूरे महाराष्ट्र में गोरक्षा का प्रचार कार्य किया| रोको भाई रोको आंदोलन, सर्वोदय मंडल आदि कार्य में वे सक्रिय रहे हैंै|

‘गो-वंश बचावो आंदोलन’ में उनके ऊपर हमले हुए, गंभीर चोंटे भी आयीं पर वो गोरक्षा का कार्य पूरे सातत्य के साथ करते रहे|

सुधाकर झाडे-आप विनोबाजी की प्रेरणा से सन् १९८२ से २०१५ तक देवनार गोरक्षा सत्याग्रह के प्रमुख सत्याग्रही रहे| उन दिनों आपके ऊपर गंभीर हमले भी हुए, देवनार सत्याग्रह प्रचार हेतु आपने पवनार से देवनार पदयात्रा के माध्यम से नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया| अपने सत्कार का उत्तर देते हुए चंदनपालजी ने कहा कि आपने सिर्फ मेरा सत्कार नहीं किया है, अपितु यह सत्कार सभी कार्यकर्ताओं का है| सुधाकर झाडेजी ने कहा की इस पुरस्कार के माध्यम से गोरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को एवं कार्यकर्ताओं को बल मिलेगा|

सत्कार समारम्भ के प्रमुख अतिथि के रूप में दक्षिण अफ्रीका से पधारीं गॉंधीजी की प्रपौत्री एवं पूर्व संसद सदस्य श्रीमती इला गॉंधी, गॉंधी पीस फाउण्डेशन की अध्यक्षा राधाबेन भट्ट, गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के संस्थापक डॉ. भवरलाल जैन, महाराष्ट्र गो-विज्ञान समिती के कार्याध्यक्ष मोहन शराफ, सेवाग्राम आश्रम के अध्यक्ष जयवंत मठकर, नई तालीम वर्धा के अध्यक्ष डॉ. सुगन बरंठ तथा मालेगॉंव वासी उपस्थित रहे| महाराष्ट्र गो-विज्ञान समिति के कार्याध्यक्ष मोहन शराफ ने सभी कार्यकर्ताओं, उपस्थित अतिथियों एवं विशेषतः भवरलाल एण्ड कान्ताबाई जैन मल्टीपर्पज फाउण्डेशन के प्रति साधुवाद प्रगट किया| कार्यक्रम का सूत्र-संचालन वैद्य अपश्चिम बरंठ ने किया|

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