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Articles - युवा श्रम संस्कार शान्ति शिविर - दापोरा में संपन्न

गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन महात्मा गॉंधी ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने की दिशा में गांवों के सर्वांगीण विकास के लिये अनेक कार्यक्रम आयोजित करता रहता है| इस वर्ष भी फाउण्डेशन ने अनेक गांवों में बच्चों तथा युवाओं के लिये विभिन्न प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किये| प्रस्तुत है एक रिपोर्ट|- सम्पादक

महात्मा गॉंधी ने गॉंव के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए ग्राम स्वराज की अवधारणा प्रस्तुत की थी| उसे साकार करने के लिए फाउण्डेशन ने प्रयोग के तौर पर छः गॉंवों को गोद लिया है| उन छ: गावों में से एक गॉंव दापोरा में दि. १८ से २३ अप्रैल २०१५ तक आवासीय युवा श्रम-संस्कार शान्ति शिविर का सफलतापूर्ण एवं नियोजनबद्ध आयोजन किया गया|

उक्त शिविर में दापोरा, मोहाडी, कड़ोली, कूर्र्‍हाडदा तथा शिरसोली गॉंव के कक्षा ७ से १२ तक के ७० छात्रों ने सहभाग लिया| शिविर का उद्घाटन समारोह ग्राम पंचायत के अध्यक्ष की अध्यक्षता में दीप जलाकर एवं महात्मा गॉंधी की प्रतिमा को सूती माला चढ़ा कर शुभारम्भ किया| इस अवसर पर जि. पं. प्रा. शाला के मुख्याध्यापक, गॉंव के प्रमुख अतिथि, शिविर के संयोजक अब्दुलभाई, फाउण्डेशन के कार्यकर्ता तथा अनेक शिविरार्थी उपस्थित थे|

पहले दिन शिविर के उद्देश्य, स्वरूप, अपेक्षा, व्यक्तिगत स्वच्छता, समूह जीवन महत्त्व, परिसर की स्वच्छता आदि की जानकारी दी गई| दूसरे दिन बच्चों के आठ दल बनाये गये| प्रत्येक दल के लियेे अलग-अलग कार्य-विभाजन किया गया| जैसे परिसर, शौचालय व स्नानागार की सफाई, निवास व्यवस्था, भोजन का प्रबंध और वितरण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, अतिथि की व्यवस्था, उपलब्ध साधनोंे की मरम्मत तथा पेय जल की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई| यह जिम्मेदारी हर दूसरे दिन बदल दी जाती थी| इस शिविर में डॉ. गोविन्द तिवारी ने योग व प्राणायाम के बारे में दूसरे दिन महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान की व अभ्यास-कार्य करवाया| तीसरे दिन कुतूहल फाउण्डेशन के अध्यक्ष श्री महेश गोराडे ने विज्ञान से संबंधित प्रयोग व जानकारी प्रदान की| चौथे दिन गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के कार्यकर्ता श्री बापूसाहेब पाटील ने अभिनय कौशल के नमूने एवं मूक नाटिका तैयार करवाई| अब्दुलभाई ने शांति, अहिंसा, सत्य एवं स्वावलंबन के बारे में शिविरार्थियों के अनुभव प्राप्त कर सभी पहलुओं पर छोटे-छोटे प्रयोग कर अपने अनुभवों से उन्हें अवगत कराया|

शिविर के अंतिम दिन सभी शिविरार्थियों को जैन हिल्स पर स्थित गॉंधी तीर्थ से परिचित कराया गया| समापन कार्यक्रम के लिए फाउण्डेशन के संस्थापक डॉ. भवरलाल जैन (बड़े भाऊ) ने पॉंच शिविरार्थियों के अभिप्राय प्राप्त किए| तीन उत्तम शिविरार्थियों को आदरणीय बड़े भाऊ ने बख्शीश प्रदान कर सम्मानित किया| शिविर के माध्यम से विद्यार्थियों में जीवनमूल्यों के प्रति अभूतपूर्व जागृति पाई गई और ऐसे शिविर बार-बार आयोजित हों, इसके लिये सभी शिविरार्थियों ने इच्छा व्यक्त की|

फाउण्डेशन की ओर से अश्विन झाला, चन्द्रशेखर पाटील, विश्वजीत पाटील, सुधीर पाटील, श्रीराम खलसे, अनिल श्रीखंडे, सुनिता श्रीखंडे एवं समाजकार्य स्नातकोत्तर अभ्यासक्रम के विद्यार्थियों ने शिविर को सफल बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई|

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