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Articles - महाप्रयाण नाटक का शुभारम्भ

राष्ट्रपिता महात्मा गॉंधी की ६७ वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन की ओर से ३० जनवरी २०१५ को बालगन्धर्व नाट्यगृह में राजकोट के कलानिकेतन संस्था द्वारा ‘महाप्रयाण नाटक’ का ५० वां प्रयोग प्रस्तुत किया गया| सेवादास दलूभाऊ जैन और इस नाटक के निर्माता श्रीमती रेणू याज्ञिक नेे राष्ट्रपिता महात्मा गॉंधी की प्रतिमा को सूतीमाला अर्पण कर इस कार्यक्रम की शुरुआत की| इस अवसर पर गॉंधी रिसर्च फाउण्डेशन के संस्थापक डॉ. भवरलालजी जैन, आमदार सुरेश भोळेे, जैन इरिगेशन के उपाध्यक्ष अशोकभाऊ जैन, कविवर्य ना. धों. महानोर, नगरसेवक अमर जैन तथा जलगॉंव शहर के रसिक दर्शक काफी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे|

गुजरात हिन्दी साहित्य अकादमी के श्रेष्ठतम् नाट्य लेखन पुरस्कार से सम्मानित श्री भरत याज्ञिक द्वारा निर्मित इस नाटक का विशेष महत्त्वपूर्ण भाग ३० जनवरी १९४८ को बिड़ला भवन, दिल्ली में महात्मा गॉंधी की दिनचर्या तथा सरदार-गॉंधी-नेहरू त्रिपुटी के गुरु-शिष्य सम्बन्धों की प्रस्तुति रहा|

देश के लिये अपना सर्वस्व समर्पित कर देनेवाले गॉंधीजी को लोगों ने अलग-अलग नजरिये से देखा| शायद, हम उन्हें सही चश्मे से नहीं देख पा रहे हैं| यही वजह है कि उनसे सम्बन्धित अनेक उलझे प्रश्‍न आज भी समाधान की अपेक्षा रखते हैं| इस नाटक में भरत याज्ञिक ने बापूजी की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण तरीके से निभायी|

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